हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय में आयोजित पीएचडी प्रवेश परीक्षा के दौरान बिजली गुल होने के मामले ने
नया मोड़ ले लिया है। घटना को लेकर अलग-अलग अधिकारियों के बयानों में विरोधाभास सामने आने के बाद पूरे मामले की
निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है।
परीक्षा के दौरान ठप हुई बिजली, कैमरे बंद होने के लगे आरोप
पीएचडी प्रवेश परीक्षा के दौरान अचानक बिजली चली जाने से परीक्षा व्यवस्था प्रभावित होने के आरोप लगे।
बताया गया कि बिजली बाधित होने के दौरान परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरे भी बंद हो गए, जिससे परीक्षा की पारदर्शिता को
लेकर सवाल खड़े होने लगे।
आर.एस. नेगी ने बताया ऋषिकेश से आया था फॉल्ट
मामले पर जब आर.एस. नेगी से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि ऋषिकेश की ओर से विद्युत फॉल्ट आने के कारण
बिजली आपूर्ति बाधित हुई थी, जिसके चलते विश्वविद्यालय परिसर में बिजली चली गई।
रजिस्ट्रार बोले- किसी अज्ञात व्यक्ति ने लिया था शटडाउन
वहीं, विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार ने इस मामले में अलग जानकारी देते हुए बताया कि बिजली किसी तकनीकी फॉल्ट से नहीं,
बल्कि किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा शटडाउन लेने के कारण बाधित हुई थी। उन्होंने कहा कि यह पता लगाया जाना आवश्यक है
कि शटडाउन किसने और किसके निर्देश पर लिया।
यूपीसीएल के अधिशासी अभियंता ने किया दावा खारिज
रीजनल रिपोर्टर की टीम ने इस मामले में उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPCL) के अधिशासी अभियंता से भी
बातचीत की। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऋषिकेश से किसी प्रकार का शटडाउन नहीं लिया गया था।
साथ ही उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर की बिजली विभाग की ओर से बंद नहीं की गई थी।
बयानों में विरोधाभास से जांच की मांग
यूपीसीएल और विश्वविद्यालय प्रशासन के बयानों में सामने आए विरोधाभास के बाद पूरे मामले पर सवाल उठ रहे हैं।
यदि परिसर में सीसीटीवी कैमरे और अन्य निगरानी व्यवस्था मौजूद थी तो शटडाउन लेने वाले व्यक्ति की पहचान की जा
सकती है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि शटडाउन किसने और किस उद्देश्य से लिया।
जांच के बाद ही सामने आएगी सच्चाई
फिलहाल इस मामले में किसी भी पक्ष की ओर से आधिकारिक जांच रिपोर्ट जारी नहीं की गई है।
परीक्षा के दौरान बिजली बाधित होने और शटडाउन को लेकर उठे सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।















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