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SC/ST छात्रवृत्ति घोटाले में ED की बड़ी कार्रवाई, 13.83 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच

उत्तराखंड के बहुचर्चित SC/ST छात्रवृत्ति घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग 13.83 करोड़

रुपये मूल्य की चल एवं अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है। यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट

(PMLA), 2002 के तहत देहरादून सब-जोनल कार्यालय द्वारा की गई है।

2020 से चल रही है जांच

उत्तराखंड में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (SC/ST) छात्रों के लिए संचालित पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना में हुए

कथित घोटाले की जांच वर्ष 2020 से जारी है। अब तक ईडी द्वारा स्पेशल PMLA कोर्ट, देहरादून में पांच अभियोजन शिकायतें

(Prosecution Complaints) दाखिल की जा चुकी हैं और पांच प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किए गए हैं।

2011 से 2017 के बीच हुआ छात्रवृत्ति घोटाला

जांच के अनुसार वर्ष 2011-12 से 2016-17 के दौरान कई निजी शिक्षण संस्थानों ने फर्जीवाड़े के जरिए SC/ST छात्रों के लिए

जारी छात्रवृत्ति राशि का दुरुपयोग किया। आरोप है कि पात्र छात्रों के बजाय फर्जी, अपात्र और अस्तित्वहीन विद्यार्थियों के नाम पर छात्रवृत्ति प्राप्त की गई।

जांच में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े

ईडी की जांच में छात्रवृत्ति के कुल 6,208 दावों में से 2,895 दावे फर्जी पाए गए।

  • 668 अनुपस्थित छात्रों को लगभग 3.85 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति वितरित दिखाई गई।
  • 84 असफल या परीक्षा में शामिल न होने वाले छात्रों के नाम पर 33.65 लाख रुपये जारी किए गए।
  • 1,662 ऐसे छात्रों को 7.34 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति दी गई, जिनका विश्वविद्यालय में पंजीकरण ही नहीं था।
  • 47 छात्रों को गैर-संबद्ध पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत दिखाकर 29.75 लाख रुपये वितरित किए गए।
  • 434 डुप्लीकेट अथवा रिकॉर्ड में नहीं मिलने वाले छात्रों के नाम पर 2 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी दिखाई गई।

छात्रों के नाम पर खोले गए बैंक खाते

जांच में यह भी सामने आया कि कई शिक्षण संस्थानों के प्रबंधन और कर्मचारियों ने छात्रों के नाम पर बैंक खाते संचालित किए।

कई खातों में एक ही मोबाइल नंबर का उपयोग किया गया।

छात्रवृत्ति की राशि इन खातों में जमा होने के बाद संस्थानों को वापस ट्रांसफर कर दी जाती थी या नकद निकासी कर ली जाती थी।

कल्याणकारी योजना के उद्देश्य को पहुंचा नुकसान

ईडी के अनुसार इस पूरे फर्जीवाड़े ने सरकार की छात्रवृत्ति योजना के मूल उद्देश्य को प्रभावित किया।

पात्र एवं जरूरतमंद छात्रों तक लाभ पहुंचाने के बजाय छात्रवृत्ति की राशि कथित रूप से संस्थानों और संबंधित लोगों द्वारा हड़प ली गई।

जांच जारी, आगे और कार्रवाई संभव

प्रवर्तन निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी जारी है।

वित्तीय लेनदेन, संपत्तियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

जांच के आधार पर आगे और संपत्ति अटैचमेंट तथा कानूनी कार्रवाई की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

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