सरकार से हस्तक्षेप की मांग
देवाल: वर्ष 2026 में प्रस्तावित नंदादेवी बड़ी जात और वर्ष 2027 में प्रस्तावित श्री नंदादेवी राजजात के आयोजन को लेकर
देवाल विकासखंड सभागार में हुई समन्वय बैठक बेनतीजा रही।
शुक्रवार को ब्लॉक प्रमुख देवाल तेजपाल रावत की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में जनप्रतिनिधियों,
मंदिर समितियों और विभिन्न पड़ावों से जुड़े प्रतिनिधियों ने अपने-अपने सुझाव और पक्ष रखे।
बैठक में कई मुद्दों को लेकर तीखी चर्चा हुई, लेकिन बड़ी जात और राजजात के आयोजन को लेकर अंतिम सहमति नहीं बन सकी।
वाण क्षेत्र ने 2027 की राजजात का किया समर्थन
बैठक में बड़ी जात के आयोजन को लेकर स्थानीय लोगों की राय ली गई।
इस दौरान वाण क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि मुंदोली न्याय पंचायत की बैठक में
पहले ही निर्णय लिया जा चुका है कि कम समय में बड़ी जात के आयोजन की तैयारियों में सहयोग देना संभव नहीं है।
वाण क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने वर्ष 2027 में राजा की अगुवाई में प्रस्तावित पारंपरिक नंदादेवी राजजात के आयोजन का समर्थन किया।

सरकार से दोनों पक्षों के बीच वार्ता कराने की मांग
बैठक में मौजूद कई जनप्रतिनिधियों ने आयोजन को लेकर सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
उनका कहना था कि सरकार को बड़ी जात और राजजात से जुड़े दोनों पक्षों को एक मंच पर बैठाकर बातचीत करनी चाहिए।
जनप्रतिनिधियों ने सरकार से यह भी स्पष्ट करने की मांग की कि राजजात का आयोजन आखिर किस वर्ष किया जाएगा।
उनका तर्क था कि अगर सरकार समय रहते जरूरी व्यवस्थाएं पूरी कर देती तो राजजात को वर्ष 2026 से आगे बढ़ाने की स्थिति नहीं बनती।
अलग-अलग पड़ावों से आए सुझावों पर हुई चर्चा
समन्वय बैठक में नंदादेवी बड़ी जात और राजजात के विभिन्न पड़ावों से मिले सुझावों पर भी चर्चा की गई।
प्रतिनिधियों ने आयोजन की तैयारियों और उससे जुड़े विभिन्न पहलुओं को लेकर अपनी राय रखी।
हालांकि, बैठक में सभी पक्षों के सुझाव सामने आने के बावजूद बड़ी जात और राजजात के आयोजन को लेकर कोई अंतिम सर्वसम्मति नहीं बन सकी।
सरकार के सामने रखे जाएंगे सभी सुझाव
बड़ी जात समिति के अध्यक्ष कर्नल हरेंद्र रावत ने कहा कि बैठक में सामने आए सभी सुझावों
और जनमत को सरकार के सामने रखा जाएगा। इसके बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी।
बैठक में बड़ी जात समिति के अध्यक्ष कर्नल हरेंद्र रावत, कुरुड़ मंदिर समिति के अध्यक्ष सुखबीर रौतेला
समेत विभिन्न क्षेत्रों के जनप्रतिनिधि और मंदिर समितियों से जुड़े प्रतिनिधि मौजूद रहे।
फिलहाल, नंदादेवी बड़ी जात के आयोजन और वर्ष 2027 में प्रस्तावित राजजात को लेकर तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं हो सकी है।
अब सभी पक्षों की राय और सुझाव सरकार के समक्ष रखे जाने के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।















Leave a Reply