5 सितंबर से शुरू होगी यात्रा
श्रीनंदा लोकजात यात्रा के कार्यक्रम को लेकर पिछले कुछ दिनों से चल रही
बधाण और कुरूड़ के बीच की बहस अब खत्म होती नजर आ रही है।
कुरूड़ के नंदा पुजारियों और मंदिर समिति ने बधाण की ओर से जारी लोकजात कार्यक्रम को समर्थन दे दिया है।
इसके बाद लोकजात यात्रा को लेकर चल रहा विवाद थमने की उम्मीद जगी है।
केंद्रीय समिति के मुताबिक, कुरूड़ में हुई बैठक में पुजारियों और मंदिर समिति ने 5 सितंबर से लोकजात शुरू करने और 25 सितंबर को देवराड़ा में समापन वाले कार्यक्रम पर सहमति जताई है।
आखिर क्यों शुरू हुआ था विवाद
श्रीनंदा लोकजात का कार्यक्रम हर साल परंपरागत रूप से सिद्धपीठ नंदा देवी मंदिर कुरूड़ से जारी किया जाता रहा है।
लेकिन इस बार 5 अगस्त को पहली बार देवराड़ा मंदिर से लोकजात यात्रा का कार्यक्रम जारी किया गया।
यहीं से विवाद की शुरुआत हुई।
कार्यक्रम जारी होने के बाद सवाल उठने लगे कि परंपरागत रूप से कुरूड़ से जारी होने वाला
कार्यक्रम इस बार देवराड़ा से क्यों जारी किया गया?
इसे लेकर कुरूड़ समिति की ओर से आपत्ति भी सामने आई और लोकजात की तिथि
तथा कार्यक्रम को लेकर दोनों पक्षों के बीच चर्चा तेज हो गई।
मामला इतना बढ़ा कि कुरूड़ समिति की ओर से कार्यक्रम को लेकर नोटिस जारी किए जाने की बात भी सामने आई।
सड़कें बंद थीं, इसलिए देवराड़ा से जारी हुआ कार्यक्रम
बधाण केंद्रीय समिति के अध्यक्ष सुशील रावत के मुताबिक, 5 अगस्त को क्षेत्र में कई जगह सड़कें बंद थीं,
जिसके चलते देवराड़ा से ही लोकजात का कार्यक्रम जारी करना पड़ा।
उन्होंने दावा किया कि कार्यक्रम जारी करने से पहले कुरूड़ के गौड़ पुजारियों के निर्देश लिए गए थे
और उन्हीं के निर्देशों का पालन करते हुए कार्यक्रम जारी किया गया।
अब कुरूड़ के पुजारियों और मंदिर समिति के समर्थन के बाद बधाण समिति के इस दावे को भी बल मिला है।
कुरूड़ में बैठक के बाद तस्वीर साफ
रविवार को कुरूड़ में गौड़ पुजारियों और मंदिर समिति की बैठक हुई।
केंद्रीय समिति के अध्यक्ष सुशील रावत के अनुसार, बैठक में देवराड़ा से जारी कार्यक्रम को सही ठहराते हुए उसे समर्थन दिया गया।
इस फैसले के बाद लोकजात यात्रा की तिथि को लेकर उठ रहे सवालों पर काफी हद तक विराम लगता दिखाई दे रहा है।
कार्यक्रम के अनुसार लोकजात यात्रा 5 सितंबर से शुरू होगी और वेदनी होते हुए 25 सितंबर को देवराड़ा में इसका समापन होगा।
वाण में भी खुशी, लाटू देवता के मंदिर में लगे जयकारे
कुरूड़ के गौड़ पुजारियों का समर्थन मिलने के बाद वाण गांव में भी खुशी का माहौल देखने को मिला।
लाटू देवता मंदिर में ग्रामीणों ने इसे परंपराओं के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
ग्रामीणों ने नंदा और लाटू देवता के जयकारे लगाए और लोकजात के कार्यक्रम को लेकर समर्थन जताया।
राजजात और बड़ी जात पर भी पड़ सकता है असर
लोकजात को लेकर कुरूड़ और बधाण के बीच बनी सहमति को केवल इस यात्रा तक सीमित नहीं माना जा रहा है।
नंदा देवी राजजात और बड़ी जात जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों में भी कुरूड़ और बधाण की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।
ऐसे में लोकजात के कार्यक्रम पर दोनों पक्षों के बीच बनी सहमति को आने वाले आयोजनों के लिए भी सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
विशेषकर 2027 में प्रस्तावित नंदा देवी राजजात को लेकर भी इन समितियों और क्षेत्रों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी माना जाता है।
क्या अब थमेगा विवाद
लोकजात के कार्यक्रम को लेकर पिछले दिनों जिस तरह बहस सामने आई थी,
उससे परंपरा, अधिकार और कार्यक्रम जारी करने की प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठे थे।
अब कुरूड़ के नंदा पुजारियों और मंदिर समिति का समर्थन मिलने के बाद विवाद खत्म होने की उम्मीद जगी है।
हालांकि, केंद्रीय समिति के अध्यक्ष सुशील रावत का कहना है कि उन्हें कार्यक्रम जारी करने को लेकर अभी तक किसी प्रकार का नोटिस नहीं मिला है।
यदि नोटिस मिलता है तो उसका जवाब दिया जाएगा।
बधाण-कुरूड़ की सहमति से आगे की राह आसान होने की उम्मीद
नंदा देवी से जुड़ी धार्मिक परंपराओं में कुरूड़ और बधाण दोनों की अपनी महत्वपूर्ण भूमिका है।
ऐसे में लोकजात के कार्यक्रम को लेकर दोनों पक्षों के बीच सहमति बनना इस यात्रा के सुचारु आयोजन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
फिलहाल कुरूड़ का समर्थन मिलने के बाद 5 सितंबर से लोकजात शुरू होने
और 25 सितंबर को देवराड़ा में समापन का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है।
अब नजर इस बात पर होगी कि आने वाले दिनों में राजजात और बड़ी जात को लेकर भी इसी तरह का समन्वय कायम रहता है या नहीं।















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