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सरोकारों से साक्षात्कार

ओंकारेश्वर मंदिर में ढोल वादकों की भूख हड़ताल

स्थायी नियुक्ति समेत कई मांगें

बाबा केदारनाथ की पंचगद्दी स्थली ओंकारेश्वर मंदिर परिसर में ढोल वादकों ने अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है।

शुक्रवार, 07 अगस्त से शुरू हुए इस आंदोलन में वर्षों से मंदिर समिति के लिए पारंपरिक सेवा दे रहे ढोल वादक शामिल हैं।

भूख हड़ताल पर बैठे वादकों का आरोप है कि लंबे समय से अपनी समस्याओं को मंदिर समिति के सामने रखने के बावजूद उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

वर्षों से मंदिर समिति के सामने रख रहे मांगें

भूख हड़ताल पर बैठे ढोल वादक हरीश चंद्र का कहना है कि वह अपने साथी वीरेंद्र लाल और विजय लाल के साथ कई वर्षों से अपनी समस्याओं को लेकर मंदिर समिति से संपर्क कर रहे हैं।

वादकों के मुताबिक इस संबंध में कई बार पत्र और ज्ञापन भी दिए गए, लेकिन उनकी शिकायतों पर सुनवाई नहीं हुई।

उनका आरोप है कि समिति के कुछ कर्मचारियों ने उनके पत्रों को आगे नहीं बढ़ाया।

वादकों का कहना है कि लगातार अनदेखी के बाद उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।

साल में सिर्फ दो महीने काम मिलने का दावा

ढोल वादक वीरेंद्र लाल के अनुसार उन्हें साल में केवल दो महीने ही ड्यूटी मिलती है।

बाकी समय उनके सामने रोजगार का संकट बना रहता है।

उनका दावा है कि छह महीने की अवधि में एक वादक को करीब 6,300 रुपये मिलते हैं।

इस हिसाब से पूरे साल में लगभग 12,600 रुपये ही भुगतान होता है।

इसके अलावा बाबा केदार की चल विग्रह उत्सव डोली के धाम जाने और वापस लौटने के दौरान तीन ढोल वादकों को आने-जाने के लिए अलग से भुगतान किए जाने की बात भी उन्होंने कही।

पूजा के दौरान भी काम नहीं देने का आरोप

वादकों का आरोप है कि वर्तमान में ओंकारेश्वर मंदिर में नियमित पूजा-अर्चना के दौरान भी उन्हें पारंपरिक वादन सेवा से अलग रखा जा रहा है।

उन्होंने इसे अपने पारंपरिक अधिकार और मंदिर की सेवा से जुड़े योगदान की अनदेखी बताया है।

क्या हैं ढोल वादकों की प्रमुख मांगें

आंदोलन कर रहे वादकों ने मंदिर समिति के सामने कई मांगें रखी हैं। इनमें प्रमुख रूप से:

  • बाजीगर समाज के हक-हकूकारियों को स्थायी नियुक्ति देना।
  • पारंपरिक अधिकारों को सम्मान के साथ लागू करना।
  • लंबे समय से लंबित मांगों का निस्तारण करना।
  • समाज के साथ कथित भेदभाव को समाप्त करना।
  • मंदिर की परंपरा में बाजीगर समाज के योगदान को मान्यता देना।

मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान

वीरेंद्र लाल ने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक वह भूख हड़ताल समाप्त नहीं करेंगे।

इस दौरान राजू लाल, विजयपाल और सतेश्वरी देवी समेत अन्य लोग भी उनके साथ मौजूद रहे।

मामले को लेकर अब धार्मिक परंपरा और स्थानीय सामाजिक अधिकारों से जुड़े सवाल उठने लगे हैं।

हालांकि, मंदिर समिति की ओर से इस पूरे मामले पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

इसलिए ढोल वादकों की ओर से लगाए गए आरोपों और मांगों पर समिति का पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।

https://youtu.be/vcFHhM6hn8M?si=W_Fxyfd4rJ3tSJMh
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