उत्तराखंड के अल्मोड़ा के युवा इनोवेटर रवि टम्टा इन दिनों अपने फ्लाइंग व्हीकल प्रोटोटाइप को लेकर चर्चा में हैं।
उनके इस अनोखे तकनीकी प्रयोग ने अब केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री अजय टम्टा का भी ध्यान खींचा है।
केंद्रीय मंत्री ने रवि टम्टा से मुलाकात कर उनके इनोवेशन के बारे में जानकारी ली और उनके प्रयासों की सराहना की।
केंद्रीय मंत्री से रवि टम्टा ने की मुलाकात
रवि टम्टा और केंद्रीय मंत्री अजय टम्टा की मुलाकात अल्मोड़ा के सर्किट हाउस में हुई।
इस दौरान केंद्रीय मंत्री ने रवि से उनके फ्लाइंग व्हीकल प्रोटोटाइप, उसकी कार्यप्रणाली और अब तक किए गए परीक्षणों के बारे में विस्तार से जानकारी ली।
अजय टम्टा ने रवि को फ्लाइंग व्हीकल की टेस्टिंग के लिए शुभकामनाएं देते हुए उनके प्रयास की सराहना की।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य से युवाओं का तकनीक और इनोवेशन के क्षेत्र में नए प्रयोग करना उत्साहजनक है।
रवि के इनोवेशन की अजय टम्टा ने की तारीफ
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि रवि टम्टा का यह इनोवेशन देश की प्रतिभा और तकनीकी क्षमता को दुनिया के सामने रखने वाला है।
उन्होंने कहा कि भारत में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है और युवाओं के ऐसे प्रयोग देश में इनोवेशन को आगे बढ़ाने में
महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
अजय टम्टा ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में स्टार्टअप और इनोवेशन को बढ़ावा दिया जा रहा है।
ऐसे में उत्तराखंड के युवाओं का तकनीकी क्षेत्र में आगे आना सकारात्मक संकेत है।
फ्लाइंग व्हीकल की टेस्टिंग का दावा
अल्मोड़ा निवासी रवि टम्टा ने फ्लाइंग कार यानी उड़ने वाले वाहन का प्रोटोटाइप तैयार किया है।
रवि ने इसके सफल परीक्षण का दावा किया है। उनका कहना है कि वह आधुनिक तकनीक की मदद से ऐसा फ्लाइंग व्हीकल
विकसित करना चाहते हैं, जो भविष्य में परिवहन के क्षेत्र में नई संभावनाएं पैदा कर सके।
रवि के इस प्रयोग की चर्चा अब स्थानीय स्तर से आगे बढ़कर दूसरे क्षेत्रों में भी हो रही है।
केंद्रीय मंत्री से मुलाकात और उनकी ओर से मिली सराहना के बाद रवि के इस प्रोजेक्ट को लेकर उम्मीदें और बढ़ गई हैं।
सरकार से मदद मिलने की उम्मीद
मुलाकात के दौरान अजय टम्टा ने रवि को भरोसा दिलाया कि इनोवेशन को आगे बढ़ाने के लिए जरूरत पड़ने पर भारत
सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग का प्रयास किया जाएगा।
अब देखना होगा कि रवि टम्टा का यह फ्लाइंग व्हीकल प्रोजेक्ट आगे किस स्तर तक पहुंचता है
और तकनीकी परीक्षणों के बाद इसे लेकर क्या संभावनाएं सामने आती हैं।















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