20 दिनों की भूख हड़ताल के बाद सफदरजंग अस्पताल में भर्ती सामाजिक कार्यकर्ता
सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर अस्पताल ने नया हेल्थ बुलेटिन जारी किया है।
अस्पताल के अनुसार उनकी हालत फिलहाल स्थिर है, लेकिन लंबे समय तक उपवास रहने के कारण शरीर पर पड़े प्रभाव को देखते हुए उन्हें विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है।
अस्पताल ने जारी किया हेल्थ बुलेटिन-4
वीएमएमसी (वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज) और सफदरजंग अस्पताल की ओर से जारी हेल्थ बुलेटिन-4 में बताया गया है कि सोनम वांगचुक के सभी जरूरी जीवन रक्षक पैरामीटर फिलहाल स्थिर हैं।
हालांकि उनके ब्लड पैरामीटर अभी भी सामान्य से कुछ बदले हुए हैं।
डॉक्टरों के अनुसार लंबे समय तक भूखे रहने की वजह से शरीर पर फिजियोलॉजिकल स्ट्रेस और कई तरह के सिस्टमेटिक प्रभाव पड़े हैं।
इसी कारण उन्हें विशेषज्ञों की बहु-विषयक (Multidisciplinary) मेडिकल टीम की निगरानी में रखा गया है।

24 घंटे क्लीनिकल मॉनिटरिंग जरूरी
अस्पताल के मुताबिक वीएमएमसी, सफदरजंग अस्पताल और एम्स, नई दिल्ली के डॉक्टरों की संयुक्त टीम का मानना है कि लगातार इलाज और 24 घंटे क्लीनिकल मॉनिटरिंग बेहद जरूरी है।
इससे किसी भी संभावित जटिलता का समय रहते पता लगाकर उसका उपचार किया जा सकेगा।
अस्पताल ने बताया कि सोनम वांगचुक को सभी आवश्यक चिकित्सीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं
और उनके ब्लड पैरामीटर समेत पूरी क्लीनिकल स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
फिलहाल हालत स्थिर
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि फिलहाल सोनम वांगचुक की हालत स्थिर बनी हुई है।
हालांकि लंबे समय तक चली भूख हड़ताल के असर को देखते हुए उन्हें अभी विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में ही रखा जाएगा।
अस्पताल उनकी स्वास्थ्य स्थिति की लगातार मॉनिटरिंग कर रहा है।
चंद्रशेखर आजाद ने छात्रों के साथ बिताई रात
नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद शनिवार देर रात जंतर-मंतर पहुंचे और छात्रों के बीच बैठकर आंदोलन को समर्थन दिया।
उन्होंने कहा कि यदि सामाजिक और राजनीतिक लोग धरना स्थल छोड़ देंगे तो छात्रों पर कार्रवाई हो सकती है।
उन्होंने बताया कि अधिकारियों ने उन्हें वहां से हटने की सलाह दी थी, लेकिन उन्होंने छात्रों के साथ ही रहने का फैसला किया।
चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि आंदोलन में शामिल अधिकांश छात्र सामान्य परिवारों से आते हैं,
इसलिए उनके साथ अन्याय होने पर आवाज उठाने के लिए समाज को उनके साथ खड़ा होना चाहिए।
उन्होंने यह भी अपील की कि आंदोलन में किसी भी राजनीतिक दल का झंडा न लाया जाए,
बल्कि केवल महापुरुषों की तस्वीरें और राष्ट्रीय प्रतीकों के साथ छात्र अपनी मांगों को शांतिपूर्ण ढंग से रखें।

अन्ना हजारे ने सरकार से बातचीत की अपील की
वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने केंद्र सरकार से सोनम वांगचुक से बातचीत करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि सरकार को उनकी सहनशक्ति की परीक्षा नहीं लेनी चाहिए।
उन्होंने कहा, “सरकार उनकी मांगों पर हां या ना कह सकती है, लेकिन बातचीत करने में क्या गलत है?”
अन्ना हजारे ने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी विवाद का समाधान संवाद से निकलना चाहिए।
उन्होंने अपने आंदोलनों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने कई बार अनशन किए, लेकिन ऐसी स्थिति पहले कभी नहीं देखी।
उनके अनुसार सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत ही किसी भी सामाजिक या जनहित के मुद्दे का सबसे प्रभावी समाधान है।
अभिजीत दीपके ने शुरू की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने सोनम वांगचुक को उनकी इच्छा के विरुद्ध अस्पताल में भर्ती कराया।
इसके विरोध में उन्होंने स्वयं अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने की घोषणा की।
उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा और सरकार को शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से कदम उठाना चाहिए।

















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