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प्रतीक रिसॉर्ट्स मामले में सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

शीर्ष अदालत ने कहा- न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होता हुआ भी दिखना चाहिए

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के एक न्यायाधीश द्वारा ‘प्रतीक रिसॉर्ट्स एंड बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड’ से जुड़े मामले में दिए गए अंतरिम आदेश पर गंभीर आपत्ति जताई है।

न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की पीठ ने कहा कि न्यायिक निष्पक्षता और औचित्य को बनाए रखना न्यायपालिका की मूल जिम्मेदारी है।

पहले कंपनी के वकील रह चुके थे न्यायाधीश

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि संबंधित न्यायाधीश वर्ष 2013 के एक पुराने मामले (वाद संख्या 1478/2013) में इसी निजी कंपनी की ओर से अधिवक्ता के रूप में पेश हो चुके थे।

चूंकि वर्तमान विवाद भी उसी भूमि से जुड़ा है, इसलिए न्यायिक मर्यादा के अनुसार उन्हें इस मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लेना चाहिए था।

पीठ ने स्पष्ट किया कि “न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होता हुआ भी दिखना चाहिए।”

अदालत ने कहा कि किसी पूर्व मुवक्किल से जुड़े मामले में पक्ष या विपक्ष में आदेश पारित करना न्यायिक निष्पक्षता के सिद्धांत के अनुरूप नहीं माना जा सकता।

अंतरिम आदेश से याचिकाओं का दायरा बढ़ाने पर भी सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि संबंधित न्यायाधीश के समक्ष लंबित मूल रिट याचिकाएं अलग-अलग विषयों से संबंधित थीं, लेकिन अंतरिम आदेशों के माध्यम से उन्होंने मामले का दायरा काफी बढ़ा दिया।

अदालत ने माना कि ऐसा भले ही जनहित की भावना से किया गया हो,

लेकिन जिन याचिकाओं का विवादित भूमि से प्रत्यक्ष संबंध नहीं था, उनमें इस तरह का हस्तक्षेप उचित प्रक्रिया नहीं माना जा सकता।

जनहित का मामला लगता तो अपनाया जा सकता था यह रास्ता

शीर्ष अदालत ने सुझाव दिया कि यदि न्यायाधीश को लगता था कि मामला व्यापक जनहित से जुड़ा है,

तो वे इसे उत्तराखंड हाईकोर्ट की जनहित याचिका (PIL) समिति के समक्ष भेज सकते थे

या आवश्यक कार्रवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश को संदर्भित कर सकते थे।

फिलहाल अंतरिम आदेश में दखल नहीं

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस चरण में हाईकोर्ट द्वारा पारित अंतरिम आदेशों में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

अदालत ने कहा कि पेड़ों की कटाई पर रोक सहित पहले से प्रभावी अंतरिम निर्देश और दिए गए आश्वासन फिलहाल जारी रहेंगे।

मामले के अन्य कानूनी पहलुओं पर निर्णय संबंधित पीठ अपने विवेक से करेगी।

मुख्य न्यायाधीश को भेजी जाएगी आदेश की प्रति

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश की प्रति उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को भेजने का निर्देश दिया है।

अदालत ने कहा कि आपराधिक रिट याचिका संख्या 762/2026 और 1431/2026 को उचित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए।

आवश्यकता पड़ने पर इस मामले में जनहित याचिका शुरू करने के लिए भी नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

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