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उत्तरकाशी की स्वतंत्रि बंधानी ने बचाई लाल धान और मिलेट की विरासत

उत्तरकाशी के नौगांव विकासखंड के कोटियालगांव की रहने वाली महिला किसान और

सामाजिक कार्यकर्ता स्वतंत्रि बंधानी ने पहाड़ की पारंपरिक कृषि विरासत को बचाने की दिशा में अलग पहचान बनाई है।

पिछले डेढ़ दशक से वह उत्तरकाशी में विलुप्त होती जा रही लाल धान, चीना और कौनी जैसी पारंपरिक फसलों को बचाने

के साथ किसानों और ग्रामीण महिलाओं को बाजार से जोड़ने का काम कर रही हैं।

कृषि के क्षेत्र में उनके योगदान और महिला सशक्तिकरण से जुड़े कार्यों के लिए उन्हें कई स्तरों पर सम्मान मिल चुका है।

हाल ही में उन्हें तीलू रौतेली सम्मान से भी सम्मानित किया गया।

2010 के बाद लाल धान बचाने की शुरू की मुहिम

स्वतंत्रि बंधानी के मुताबिक उत्तरकाशी में लाल धान की पारंपरिक खेती धीरे-धीरे खत्म होती जा रही थी।

उत्पादन घट रहा था और किसान इस फसल से दूर होते जा रहे थे। ऐसे में उन्होंने वर्ष 2010 के बाद लाल धान की विरासत को बचाने का बीड़ा उठाया।

उन्होंने इस काम को सिर्फ खेती तक सीमित नहीं रखा। लाल धान को बचाने के लिए उन्होंने तीन स्तरों पर काम किया—उत्पादन, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग।

किसानों के साथ मिलकर उत्पादन बढ़ाया गया, इसके बाद प्रोसेसिंग यूनिट के जरिए उत्पाद को तैयार किया गया और फिर अलग-अलग माध्यमों से बाजार तक पहुंचाया गया।

खेत से बाजार तक किसानों को जोड़ा

स्वतंत्रि बंधानी स्वयं सहायता समूहों और Farmer Producer Organisation यानी FPO के साथ मिलकर काम करती हैं।

उनका मॉडल किसानों को सिर्फ फसल उगाने तक सीमित रखने के बजाय उसे बाजार से जोड़ने पर आधारित है।

उनके मुताबिक किसानों से तैयार उत्पाद खरीदकर उसकी ग्रेडिंग, पैकेजिंग और वैल्यू एडिशन किया जाता है।

इसके बाद उत्पाद को बाजार तक पहुंचाया जाता है।

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों में भी उत्तरकाशी के लाल धान को प्रदर्शित किया है।

इससे स्थानीय उत्पाद को व्यापक बाजार में पहचान दिलाने की कोशिश की गई।

चीना और कौनी के बीज तक नहीं मिल रहे थे

लाल धान के साथ स्वतंत्रि बंधानी ने पारंपरिक मिलेट चीना और कौनी को बचाने पर भी काम किया।

उन्होंने बताया कि एक समय उत्तरकाशी में इन दोनों फसलों के बीज तक आसानी से उपलब्ध नहीं थे।

ऐसे में उन्होंने बाहर से बीज मंगाकर स्वयं सहायता समूहों और किसानों को उपलब्ध कराया।

इसके बाद किसानों के साथ मिलकर इनके क्लस्टर तैयार किए गए।

एक बार फसल तैयार होने के बाद उससे प्राप्त बीज को दोबारा दूसरे गांवों के किसानों तक पहुंचाया गया।

इस तरह धीरे-धीरे इन पारंपरिक फसलों का दायरा बढ़ाया गया।

कुछ किलो से कई क्विंटल तक पहुंची मार्केटिंग

स्वतंत्रि बंधानी के मुताबिक शुरुआत में उनके आउटलेट पर चीना और कौनी के कुछ किलो बीज तक उपलब्ध नहीं थे।

लेकिन किसानों के साथ लगातार काम करने के बाद आज वह कई क्विंटल चीना और कौनी की मार्केटिंग कर रही हैं।

उनका मॉडल यह है कि किसानों से उत्पाद लिया जाए, उसकी ग्रेडिंग और पैकेजिंग की जाए और फिर बाजार में बेचा जाए।

इससे किसानों को बाजार मिलता है और पारंपरिक फसलों की मांग भी तैयार होती है।

महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने पर जोर

स्वतंत्रि बंधानी का काम सिर्फ कृषि तक सीमित नहीं है। वह ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर भी जोर देती हैं।

उनका कहना है कि आज गांव की महिलाएं पहले की तुलना में ज्यादा आत्मविश्वास के साथ बाजार और उद्यमिता से जुड़ रही हैं।

जो महिलाएं पहले अपने गांव से बाहर बाजार तक नहीं आती थीं, वे अब अपने उत्पादों को बेचने और आर्थिक गतिविधियों में भाग लेने लगी हैं।

उनके मुताबिक, महिला सशक्तिकरण का सबसे मजबूत रास्ता आर्थिक आत्मनिर्भरता है।

परिवार का तिलाड़ी कांड से भी जुड़ा इतिहास

स्वतंत्रि बंधानी अपने परिवार की विरासत को भी अपनी प्रेरणा का हिस्सा मानती हैं।

उनके मुताबिक उनके दादा जी ने तिलाड़ी कांड में सक्रिय भूमिका निभाई थी।

उन्होंने बताया कि उनके दादा जी स्वतंत्रता सेनानी थे और वर्ष 1972 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उन्हें ताम्रपत्र देकर सम्मानित किया था।

तिलाड़ी आंदोलन से जुड़े परिवार से आने के कारण सामाजिक और सामुदायिक मुद्दों पर काम करने की प्रेरणा उन्हें परिवार से ही मिली।

अंकिता भंडारी मामले पर भी रखी अपनी बात

महिला सुरक्षा के सवाल पर स्वतंत्रि बंधानी ने उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड का भी जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि अंकिता भी उत्तराखंड की बेटी थी और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए बेटियों को बचपन से ही मजबूत बनाने की जरूरत है।

उन्होंने महिलाओं और लड़कियों के लिए आत्मरक्षा प्रशिक्षण को जरूरी बताते हुए कहा कि शिक्षा के साथ उन्हें विपरीत

परिस्थितियों से निपटने के लिए भी तैयार किया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों को बचपन से ही सही संस्कार और व्यवहार की सीख मिलनी चाहिए, ताकि समाज में महिलाओं के प्रति सम्मान की भावना मजबूत हो।

कई सम्मानों से सम्मानित हो चुकी हैं स्वतंत्रि

कृषि और सामाजिक क्षेत्र में काम के लिए स्वतंत्रि बंधानी को कई सम्मान मिल चुके हैं।

इनमें किसान श्री, किसान भूषण और वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट से जुड़े सम्मान शामिल हैं।

वह अपने इन सम्मानों को ग्रामीण महिलाओं और किसानों को समर्पित करती हैं। उनका कहना है कि जमीन पर काम करने वाली महिलाओं का जज्बा ही उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

पहाड़ की खेती को बाजार से जोड़ने की कोशिश

स्वतंत्रि बंधानी की कहानी उस बदलाव को दिखाती है, जिसमें पहाड़ की पारंपरिक खेती को आधुनिक बाजार से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।

लाल धान, चीना और कौनी जैसी फसलों के बीज बचाने से लेकर उत्पादन, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग

और मार्केटिंग तक काम करने वाली स्वतंत्रि बंधानी का प्रयास उत्तरकाशी की पारंपरिक कृषि विरासत को नई पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

उनकी कोशिश है कि पहाड़ के किसानों को अपनी पारंपरिक फसलों के लिए बाजार मिले

और आने वाली पीढ़ियां इन फसलों को सिर्फ इतिहास के पन्नों में नहीं, बल्कि खेतों में भी देख सकें।

https://regionalreporter.in/uttarakhand-sir-2026-156-objections-one-name-1124-top-10/
https://youtu.be/vcFHhM6hn8M?si=GOyOoqOpeayqqd6x
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