उत्तराखंड के लाखों राशन कार्ड धारकों के लिए राहत भरी खबर है। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने जुलाई माह से जुलाई,
अगस्त और सितंबर तीन माह का खाद्यान्न एक साथ वितरित करने का निर्णय लिया है। राज्य सरकार का यह फैसला मानसून
सीजन के दौरान दूरस्थ क्षेत्रों में आपूर्ति बाधित होने की आशंका को देखते हुए लिया गया है। एक जुलाई से सरकारी सस्ता
गल्ला दुकानों के माध्यम से वितरण प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
तीन माह का राशन एक साथ मिलेगा
खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग के अनुसार राशन कार्ड धारकों को इस बार एक ही बार में तीन महीने का खाद्यान्न उपलब्ध
कराया जाएगा। इससे लाभार्थियों को बार-बार राशन की दुकानों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और बारिश के मौसम में खाद्यान्न
की उपलब्धता भी सुनिश्चित होगी।
राशन के साथ मिलेगा नमक
सरकार ने इस बार राशन के साथ पात्र कार्ड धारकों को निर्धारित शुल्क पर नमक उपलब्ध कराने का भी निर्णय लिया है।
विभाग का दावा है कि नमक की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए लैब परीक्षण के बाद ही उसकी आपूर्ति राशन दुकानों तक की जा रही है।
मानसून को देखते हुए विशेष व्यवस्था
पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों में मानसून के दौरान सड़कें बाधित होने और आपूर्ति प्रभावित होने की संभावना रहती है।
इसी वजह से विभाग ने अग्रिम रूप से तीन महीने का राशन उपलब्ध कराने की योजना बनाई है, ताकि किसी भी स्थिति में
लाभार्थियों को खाद्यान्न की कमी का सामना न करना पड़े।
गोदामों में पर्याप्त खाद्यान्न उपलब्ध
विभाग के अनुसार राज्य के सभी सरकारी गोदामों में पर्याप्त मात्रा में खाद्यान्न उपलब्ध है। राशन विक्रेताओं को आवश्यकता के अनुसार चरणबद्ध तरीके से स्टॉक उपलब्ध कराया जाएगा। दुकानों के सीमित भंडारण क्षमता को देखते हुए एक साथ पूरा स्टॉक देने के बजाय मासिक उठान की व्यवस्था लागू की गई है।
एक जुलाई से शुरू होगा वितरण
खाद्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक एक माह का खाद्यान्न पहले ही राशन दुकानों तक पहुंचाया जा चुका है।
शेष स्टॉक आवश्यकता अनुसार उपलब्ध कराया जाएगा। विभाग ने सभी राशन कार्ड धारकों से निर्धारित समय पर अपनी
दुकान से खाद्यान्न प्राप्त करने की अपील की है।
लाखों उपभोक्ताओं को मिलेगा लाभ
राज्य सरकार के इस फैसले से अंत्योदय, प्राथमिक परिवार और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना (NFSA) से जुड़े लाखों लाभार्थियों
को फायदा मिलेगा। सरकार का मानना है कि इससे आपूर्ति व्यवस्था मजबूत होगी और दूरदराज के इलाकों में खाद्यान्न संकट
की संभावना कम होगी।


















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