1 अगस्त से नगर निकाय संभालेंगे संचालन
शहरी गरीबों को मिलती रहेंगी स्वास्थ्य सेवाएं, ब्रिडकुल के साथ एमओयू अंतिम चरण में
उत्तराखंड के मलिन बस्तियों और शहरी क्षेत्रों में रहने वाले आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए राहत भरी खबर है।
प्रदेश के 114 शहरी आयुष्मान आरोग्य मंदिर बंद नहीं होंगे।
1 अगस्त 2026 से इनका संचालन अस्थायी रूप से संबंधित नगर निकायों के माध्यम से किया जाएगा,
जिससे स्वास्थ्य सेवाएं बिना किसी बाधा के जारी रहेंगी।
ब्रेथवेट कंपनी को संचालन रोकने के निर्देश
निदेशक शहरी विकास विनोद गोस्वामी ने ब्रेथवेट कंपनी के अधिकारियों को पत्र जारी कर स्पष्ट किया है कि कंपनी का अनुबंध 29 मई 2026 को समाप्त हो चुका था।
विभाग की अनुमति के अनुसार कंपनी केवल 17 जुलाई तक ही आरोग्य मंदिरों का संचालन कर सकती थी।
अब 31 जुलाई के बाद कंपनी किसी भी आरोग्य मंदिर का संचालन नहीं करेगी।
ब्रिडकुल को बनाया गया कार्यदायी संस्थान
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए शहरी विकास विभाग ने ब्रिज, रोपवे, टनल एंड अदर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (ब्रिडकुल) को इन आरोग्य मंदिरों के संचालन के लिए कार्यदायी संस्था नामित किया है।
इसके लिए 79 करोड़ रुपये का बजट भी शहरी निकायों को जारी किया जा चुका है।
एमओयू अंतिम चरण में, नगर निकाय करेंगे व्यवस्था
फिलहाल शहरी विकास विभाग और ब्रिडकुल के बीच एमओयू (MoU) की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
ब्रिडकुल के महाप्रबंधक कमल सैनी के अनुसार, समझौते की औपचारिकताएं पूरी होते ही आगे की संचालन प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
इस बीच, स्वास्थ्य सेवाओं में कोई व्यवधान न आए, इसके लिए संबंधित नगर निकाय अस्थायी रूप से आरोग्य मंदिरों का संचालन करेंगे।
आवश्यकता पड़ने पर नगर निकाय किसी योग्य संस्था का चयन कर संचालन की जिम्मेदारी भी सौंप सकेंगे।
गरीबों की स्वास्थ्य सेवाएं रहेंगी निर्बाध
सरकार के इस फैसले से शहरी गरीब और जरूरतमंद लोगों को आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं पहले की तरह मिलती रहेंगी।
विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संचालन व्यवस्था में बदलाव के बावजूद मरीजों को इलाज और स्वास्थ्य सुविधाओं में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।















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