भारत और चीन के बीच लंबे समय से रुका हुआ सीमा व्यापार फिर से शुरू होने जा रहा है। एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) और विश्व बैंक का अनुमान है कि इस बहाली से शुरुआती चरण में ही दोनों देशों को सालाना 5–6 अरब डॉलर का फायदा होगा।
पारंपरिक मार्ग होंगे खुले
नई सहमति के तहत हिमाचल का शिपकी ला, सिक्किम का सनाथुला और अरुणाचल प्रदेश का बोमडिला मार्ग प्राथमिकता से खोला जाएगा। इससे न सिर्फ पारंपरिक व्यापार को गति मिलेगी बल्कि सीमावर्ती गांवों को नया रोजगार और बाजार का सहारा भी मिलेगा।
विनिर्माण क्षमता को बढ़ावा
भारत को चीन से दुर्लभ धातुओं की आपूर्ति का आश्वासन मिला है, जो इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा और ऊर्जा उद्योगों के लिए बेहद जरूरी हैं। इसके बदले भारत चीन को फॉस्फेट और पोटाश आधारित उर्वरक उपलब्ध कराएगा। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम भारत की विनिर्माण क्षमता को मजबूती देगा और चीन की खाद्य सुरक्षा रणनीति को सहारा देगा।
US टैरिफ से राहत
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि अमेरिका की संरक्षणवादी नीतियों और टैरिफ से भारत को सालाना 3–5 अरब डॉलर का नुकसान हो रहा था। चीन के साथ व्यापार बढ़ने से यह नुकसान काफी हद तक पूरा हो सकेगा।
चीन पर निर्भरता चिंता का विषय
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनीशिएटिव (GTRI) ने चेतावनी दी है कि भारत को चीन पर निर्भरता घटानी होगी। 2024-25 में भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा 100 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। दूरसंचार, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और फार्मा सेक्टर में चीन की हिस्सेदारी बहुत अधिक है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को घरेलू विनिर्माण में निवेश बढ़ाना होगा, ताकि वह चीन के साथ समान शर्तों पर व्यापार कर सके।
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