रीजनल रिपोर्टर

सरोकारों से साक्षात्कार

कुमाऊं में बाघ का दूसरा हमला, शव रखकर हाईवे जाम

उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष एक बार फिर भयावह रूप लेता दिख रहा है।

बीते 13 दिनों के भीतर बाघ के हमले में दूसरी महिला की मौत से इलाके में तनाव फैल गया।

गुस्साए ग्रामीणों ने मृतका का शव सड़क पर रखकर प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया और मुख्य राजमार्ग को जाम कर दिया।

जंगल गई महिला बनी बाघ का शिकार

ताजा घटना पनियाली गांव की है, जहां कमला देवी बुधवार सुबह करीब 8 बजे जंगल की ओर गई थीं। देर शाम तक उनके वापस न लौटने पर ग्रामीणों ने खोजबीन शुरू की।

कुछ दूरी पर जंगल के भीतर उनका क्षत-विक्षत शव मिला, जिससे गांव में सनसनी फैल गई।

13 दिन पहले भी हुई थी एक महिला की मौत

यह घटना 13 दिन पहले पीपलपोखरा गांव में हुई एक अन्य महिला गंगा देवी की मौत के बाद सामने आई है।

लगातार दूसरी घटना ने ग्रामीणों में दहशत और आक्रोश दोनों बढ़ा दिए हैं।

शव रखकर हाईवे जाम, वन विभाग पर लापरवाही का आरोप

घटना की सूचना के बाद भी देर तक वन विभाग की टीम मौके पर नहीं पहुंची।

इससे नाराज ग्रामीणों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों के नेतृत्व में कमला देवी के शव को काठगोदाम-हल्द्वानी मुख्य मार्ग पर ले जाकर प्रदर्शन शुरू कर दिया।

ग्रामीणों ने सड़क जाम कर यातायात पूरी तरह ठप कर दिया और वन विभाग के स्थानीय कार्यालय के बाहर जमकर नारेबाजी की।

पुलिस-प्रशासन मौके पर, हालात संभाले

स्थिति बिगड़ती देख एसपी सिटी के नेतृत्व में भारी पुलिस बल और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे।

अधिकारियों को ग्रामीणों के तीखे विरोध का सामना करना पड़ा। लोगों ने सवाल उठाया कि पहली घटना के बाद भी बाघ को पकड़ने के लिए ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए।

लिखित आश्वासन के बाद खत्म हुआ प्रदर्शन

काफी देर तक चली बातचीत के बाद प्रशासन ने ग्रामीणों को लिखित आश्वासन दिया।

इसमें बाघ को “आदमखोर” घोषित करने की प्रक्रिया शुरू करने, विशेष पिंजरे और कैमरा ट्रैप लगाने, पीड़ित परिवार को अंतरिम मुआवजा देने और जंगल से सटे इलाकों में गश्त बढ़ाने का भरोसा शामिल था।

इसके बाद ग्रामीणों ने सड़क जाम हटाया और पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।

इलाके में दहशत बरकरार

हालांकि प्रदर्शन खत्म हो गया है, लेकिन बाघ अब भी खुले में है। ग्रामीणों में डर का माहौल बना हुआ है और लोग रात के समय घरों से बाहर निकलने से कतरा रहे हैं।

यह घटना उत्तराखंड के तराई और पहाड़ी इलाकों में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीर तस्वीर पेश करती है।

https://regionalreporter.in/house-listing-to-begin-in-uttarakhand-from-april-25/
https://youtu.be/sxi1IY4z-0c?si=QoVMjGbzkL87sjWa
Website |  + posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: