हाईकोर्ट आदेश के बाद शासन की कार्रवाई
पिटकुल प्रकरण में अवमानना सुनवाई से पहले बड़ा फैसला, ऊर्जा विभाग में मचा हड़कंप
उत्तराखंड में पिटकुल प्रकरण ने नया मोड़ ले लिया है।
Power Transmission Corporation of Uttarakhand Limited (पिटकुल) के प्रभारी एमडी पीसी ध्यानी को पद से हटा दिया गया है।
यह कार्रवाई हाईकोर्ट के आदेश के बाद की गई है।
हालांकि, इससे पहले वह उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग की जनसुनवाई में मौजूद थे और बीच में ही बाहर चले गए।
क्या हुआ जनसुनवाई में
शुक्रवार को करीब 12 बजे ध्यानी जनसुनवाई कक्ष में पहुंचे। वह यूजेवीएनएल के एमडी डॉ. संदीप सिंघल के बगल में बैठे।
करीब एक घंटे बाद वह अचानक बाहर निकल गए। पहले किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया।
लेकिन जैसे ही हाईकोर्ट की खबर सोशल मीडिया पर फैली, चर्चाएं तेज हो गईं।
हाईकोर्ट का आदेश और शासन की कार्रवाई
सूत्रों के अनुसार, हाईकोर्ट ने 18 फरवरी को उन्हें हटाने का निर्देश दिया था।
शुक्रवार को अवमानना मामले में सुनवाई भी होनी थी। इसी बीच शासन ने उन्हें पद से मुक्त कर दिया।
अब अपर सचिव ऊर्जा मेहरबान सिंह बिष्ट को पिटकुल का प्रभार सौंपा गया है।
26 फरवरी का आदेश, 27 को मौजूदगी
सरकारी आदेश पर 26 फरवरी की तिथि दर्ज है। हालांकि 27 फरवरी को ध्यानी जनसुनवाई में बतौर एमडी मौजूद थे।
यही कारण है कि अब आदेश की समय-सीमा पर सवाल उठ रहे हैं।
पिटकुल मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन
जन प्रहार संगठन ने पिटकुल मुख्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने ऊर्जा मंत्री के खिलाफ नारेबाजी की और पुतला दहन किया।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह मामला केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि कानून के सम्मान से जुड़ा है।
शासन का आधिकारिक पक्ष
प्रमुख सचिव ऊर्जा आर मीनाक्षी सुंदरम की ओर से जारी आदेश में बताया गया कि 10 सितंबर 2022 को पीसी ध्यानी को अस्थायी रूप से प्रभारी एमडी बनाया गया था।
अब नई प्रशासनिक व्यवस्था लागू कर दी गई है।
आगे क्या
अब निगाहें इस बात पर हैं कि क्या सरकार पुनर्विचार याचिका दायर करेगी। साथ ही अवमानना मामले में आगे की कार्रवाई भी महत्वपूर्ण रहेगी।
ऊर्जा विभाग का यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक बहस का केंद्र बन चुका है।

















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