रीजनल रिपोर्टर

सरोकारों से साक्षात्कार

12 साल से कोमा में पड़े युवक को सुप्रीम कोर्ट ने दी निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति

हरीश राणा के मामले में कोर्ट का बड़ा फैसला

AIIMS में हटेगी कृत्रिम जीवन रक्षक प्रणाली

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार, 11 मार्च को को 31 वर्षीय युवक हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु

(Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी।

हरीश पिछले 12 साल से कोमा की स्थिति में हैं और पूरी तरह से दूसरों पर निर्भर हैं।

कोर्ट के आदेश के बाद उनकी कृत्रिम जीवन रक्षक प्रणाली हटाई जाएगी

न्यायमूर्ति जे.बी. परदीवाला और के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने एम्स दिल्ली को

निर्देश दिया है कि हरीश राणा को उपशामक देखभाल (Palliative Care) इकाई में भर्ती किया जाए

और उपचार बंद करने की प्रक्रिया गरिमा के साथ पूरी की जाए।

2013 में हादसे के बाद हो गए थे पूरी तरह दिव्यांग

गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन स्थित राज अंपायर में रहने वाले हरीश राणा वर्ष

2013 में एक इमारत की चौथी मंजिल से गिर गए थे। इस हादसे में उनके सिर और कमर में गंभीर चोटें आईं।

दुर्घटना के बाद वे क्वाड्रिप्लेजिया से पीड़ित हो गए और उनका शरीर पूरी तरह निष्क्रिय हो गया।

तब से वे कोमा की स्थिति में हैं।

माता-पिता ने अदालत से लगाई थी गुहार

हरीश के माता-पिता पिछले कई वर्षों से उनके इलाज और देखभाल में लगे हुए हैं।

उन्होंने बेटे की हालत को देखते हुए अदालत से इच्छामृत्यु की अनुमति देने की गुहार लगाई थी।

हालांकि 8 जुलाई 2025 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी।

इसके बाद परिवार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

डॉक्टरों ने बताई ठीक होने की संभावना बेहद कम

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान डॉक्टरों की रिपोर्ट का अध्ययन किया।

मेडिकल बोर्ड ने बताया कि हरीश राणा की हालत बेहद गंभीर है और उनके ठीक होने की संभावना लगभग नगण्य है।

लंबे समय तक बिस्तर पर रहने के कारण उन्हें गंभीर बेडसोर भी हो चुके हैं, जो बेहद दर्दनाक हैं।

कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि मरीज की स्थिति बेहद दयनीय है और अब इस मामले में निर्णय लेना जरूरी है।

बेटे के इलाज में बिक गया मकान

हरीश के पिता अशोक राणा ने बताया कि बेटे के इलाज में परिवार ने अपनी पूरी जमा पूंजी लगा दी।

उन्होंने कहा कि दिल्ली के महावीर एंक्लेव में उनका तीन मंजिला मकान था, जिसे सितंबर 2021 में बेच दिया गया।

परिवार ने पीजीआई चंडीगढ़, एम्स, आरएमएल, एलएनजेपी और अपोलो अस्पताल

समेत कई जगह इलाज कराया, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ।

बेटे के अंग दान करने की इच्छा

हरीश के पिता ने कहा कि बेटे के लिए मौत मांगना आसान फैसला नहीं है।

लेकिन हर दिन उसकी पीड़ा देखना भी संभव नहीं है।

उन्होंने इच्छा जताई है कि अगर संभव हो तो हरीश के जो अंग काम कर रहे हैं,

उन्हें दान कर दूसरों को नया जीवन दिया जाए

क्या होती है निष्क्रिय इच्छामृत्यु?

निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) में मरीज को जानबूझकर मरने देने के लिए

जीवन रक्षक उपकरण या इलाज को रोक दिया जाता है।

इसमें मरीज को कोई घातक दवा नहीं दी जाती, बल्कि कृत्रिम जीवन रक्षक प्रणाली हटाकर

प्राकृतिक मृत्यु होने दी जाती है

सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2023 में जारी दिशानिर्देशों के अनुसार ऐसे मामलों में विशेषज्ञों की राय लेने के लिए दो मेडिकल बोर्ड बनाने का प्रावधान तय किया है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा – अब कुछ करना होगा

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि डॉक्टरों की रिपोर्ट से साफ है कि मरीज की हालत बेहद गंभीर और पीड़ादायक है।

कोर्ट ने कहा, “हमें अब कुछ करना होगा। हम उन्हें इस हालत में जीने के लिए मजबूर नहीं कर सकते।”

https://youtu.be/qoPe6hbgrxw?si=Vo-gHbZat_XRxyOV
https://regionalreporter.in/uttarakhand-budget-session-day-3-rekha-arya-question-hour/
Website |  + posts

Leave a Reply

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *