KitKat ने अपनी मशहूर टैगलाइन “Have a Break” को अब एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है।
कंपनी ने एक खास रैपर लॉन्च किया है, जिसका नाम “Break Mode” रखा गया है।
यह सिर्फ चॉकलेट का रैपर नहीं, बल्कि ऐसा स्मार्ट पैकेजिंग कवर है जो आपके मोबाइल के सिग्नल पूरी तरह ब्लॉक कर देता है।
यानी अब आप सच में “Take a Break” ले सकते हैं सोशल मीडिया, नोटिफिकेशन और लगातार बजते फोन से पूरी दूरी बनाकर।
कैसे काम करता है यह नया रैपर?
KitKat का यह नया रैपर Faraday Cage तकनीक पर आधारित है।
इसमें फोन रखने पर मोबाइल नेटवर्क, Wi-Fi, Bluetooth, GPS और रेडियो सिग्नल ब्लॉक हो जाते हैं।
फोन कॉल, मैसेज और इंटरनेट सभी बंद हो जाते हैं, जिससे यूजर पूरी तरह डिजिटल दुनिया से कट जाता है।
इस खास पैकेजिंग को Nestlé की KitKat Panama टीम ने Ogilvy Colombia के साथ मिलकर तैयार किया है।
रैपर में क्या है खास?
यह साधारण एल्युमिनियम फॉयल नहीं है। इसमें polyester, conductive copper,
nickel और polypropylene की मल्टी-लेयर स्ट्रक्चर दी गई है, जो सिग्नल को अंदर-बाहर जाने से रोकती है।
कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार इसकी effectiveness लगभग 100% तक बताई गई है।
कंपनी का कहना है कि यह रैपर लगभग एक साल तक उपयोगी रहेगा और बाद में इसे recycle भी किया जा सकेगा।
क्यों लॉन्च किया गया Break Mode
आज के दौर में लोग ब्रेक के समय भी मोबाइल से दूर नहीं हो पाते।
लगातार scrolling, messaging और notifications की वजह से मानसिक थकान बढ़ रही है।
इसी समस्या को देखते हुए KitKat ने अपने “Have a Break” संदेश को वास्तविक अनुभव में बदलने की कोशिश की है।
Nestlé की मार्केटिंग डायरेक्टर किम वेइगेल ने कहा कि उनका उद्देश्य लोगों को डिजिटल दुनिया से सच में ब्रेक दिलाना है-आप KitKat खोलें,
फोन अंदर रखें और बिना किसी disturbance के उस पल को जिएं।
पनामा से शुरू हुई पहल
यह “Break Mode” रैपर फिलहाल Panama में technology expos, concerts
और university campuses जैसे आयोजनों में पेश किया गया है।
खासतौर पर युवाओं को digital detox का अनुभव देने के लिए इसे प्रचारित किया जा रहा है।
क्या घर की फॉयल से भी हो सकता है ऐसा?
विशेषज्ञों के अनुसार, घर में मौजूद aluminum foil भी कुछ हद तक सिग्नल ब्लॉक कर सकती है, लेकिन KitKat का नया रैपर इसी उद्देश्य के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया है, इसलिए इसकी क्षमता अधिक प्रभावी मानी जा रही है।
अब सवाल यही हैक्या लोग सच में मोबाइल से ब्रेक लेना चाहेंगे, या सिर्फ चॉकलेट खाकर फिर से स्क्रीन पर लौट जाएंगे?
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