चमोली जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान (Valley of Flowers National Park) आज से पर्यटकों के लिए
खोल दी गई है। यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के रूप में पहचान रखने वाली यह घाटी हर वर्ष लाखों प्रकृति प्रेमियों, ट्रेकर्स और
पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। घाटी के खुलने से स्थानीय पर्यटन कारोबार में भी नई उम्मीद जगी है।
अक्टूबर तक कर सकेंगे भ्रमण
फूलों की घाटी प्रत्येक वर्ष 1 जून से 31 अक्टूबर तक पर्यटकों के लिए खुली रहती है। मौसम और बर्फबारी की स्थिति के
अनुसार अक्टूबर के अंत तक पर्यटक यहां प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद ले सकते हैं। मानसून के आगमन के साथ घाटी में रंग-
बिरंगे फूल खिलने शुरू हो जाते हैं, जो जुलाई से सितंबर के बीच अपने चरम पर होते हैं।
500 से अधिक प्रजातियों के फूलों का अनोखा संसार
घाटी में ब्रह्म कमल, ब्लू पोस्ता (Blue Poppy), कोबरा लिली सहित 500 से अधिक देशी और विदेशी प्रजातियों के फूल खिलते
हैं। फूलों की रंगीन चादर से ढकी यह घाटी पर्यटकों को किसी स्वर्ग से कम नहीं लगती। यहां की प्राकृतिक सुंदरता हर साल
हजारों सैलानियों को आकर्षित करती है।
ट्रेकिंग प्रेमियों के लिए खास आकर्षण
फूलों की घाटी पहुंचने के लिए पर्यटकों को गोविंदघाट से लगभग 13 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर घांघरिया पहुंचना होता है।
इसके बाद घाटी का प्रवेश द्वार घांघरिया से करीब 3 किलोमीटर दूर स्थित है। घाटी के भीतर केवल दिन के समय भ्रमण की
अनुमति होती है और सभी पर्यटकों को सूर्यास्त से पहले वापस लौटना अनिवार्य होता है।
जैव विविधता का अनमोल खजाना
करीब 12,995 फीट की ऊंचाई पर स्थित फूलों की घाटी लगभग 87.5 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली हुई है।
यह नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व का हिस्सा है और अपनी समृद्ध जैव विविधता के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है।
घाटी में दुर्लभ वन्यजीव, रंग-बिरंगी तितलियां, औषधीय जड़ी-बूटियां, प्राकृतिक झरने, पुष्पावती नदी, रतवान ग्लेशियर और बर्फ
से ढकी पर्वत श्रृंखलाएं इसकी सुंदरता को और भी आकर्षक बनाती हैं।
पर्यटन कारोबार को मिलेगा बढ़ावा
फूलों की घाटी के खुलने से स्थानीय होटल, होमस्टे, ट्रैवल एजेंसियों और पर्यटन से जुड़े व्यवसायों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।
हर साल हजारों देशी-विदेशी पर्यटक यहां पहुंचकर हिमालयी प्राकृतिक सौंदर्य का दीदार करते हैं।

लेखिका बीते ढाई दशक से पत्रकारिता क्षेत्र में सक्रिय हैं.वर्ष 2015 से रीजनल रिपोर्टर के संपादक के पद पर कार्यरत हैं.















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