2008 के मानकों को लागू करने पर जोर
दिल्ली में हुई बैठक में उठी मांग, शासनादेश की अस्पष्टता दूर करने की अपील
चिह्नित राज्य आंदोलनकारी समिति, दिल्ली प्रदेश की बैठक में राज्य आंदोलनकारियों के चिह्नीकरण की प्रक्रिया में तेजी लाने और मानकों में स्पष्टता लाने की मांग की गई।
समिति का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में कई जिलों में शासनादेश का सही अनुपालन नहीं हो रहा है।
2008 के मानकों को लागू करने की मांग
समिति के अध्यक्ष मनमोहन सिंह ने कहा कि वर्ष 2008 के शासनादेश में अखबारों की कटिंग
और अन्य दस्तावेजों को भी चिह्नीकरण का आधार माना गया था।
उन्होंने मांग की कि पुराने मानकों को फिर से प्रभावी रूप से लागू किया जाए ताकि अधिक से अधिक आंदोलनकारियों को न्याय मिल सके।
कुछ जिलों में नहीं पहुंचा नया शासनादेश
बैठक में बताया गया कि 9 नवंबर 2025 का शासनादेश कुछ जिलों, विशेषकर रुद्रप्रयाग और अल्मोड़ा तक नहीं पहुंच पाया है।
इसके कारण वहां अभी भी 2017 के मानकों के आधार पर केवल जेल जाने और घायल होने वाले आंदोलनकारियों का ही चिह्नीकरण किया जा रहा है।
मंत्री सुभाष बड़थ्वाल का दिया हवाला
समिति ने बताया कि उत्तराखंड आंदोलनकारी सम्मान परिषद के उपाध्यक्ष
एवं राज्यमंत्री Subhash Barthwal भी अखबारों की कटिंग को चिह्नीकरण का आधार बनाए जाने के पक्ष में हैं।
समिति के अनुसार इससे प्रक्रिया अधिक व्यापक और प्रभावी बन सकेगी।
24 सितंबर 2026 तक बढ़ी है समय सीमा
बैठक में यह भी उल्लेख किया गया कि राज्य सरकार ने चिह्नीकरण की प्रक्रिया की समय सीमा बढ़ाकर 24 सितंबर 2026 कर दी है।
समिति ने इस अवधि का उपयोग करते हुए लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण करने की मांग की।















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