रामनगर के एक रिजॉर्ट में कथित हाई-प्रोफाइल सेक्स रैकेट के भंडाफोड़ के बाद उत्तराखंड की कानून-व्यवस्था और रिजॉर्ट
संचालन पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। पुलिस कार्रवाई में बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया गया और कई महिलाओं
को रेस्क्यू किया गया, लेकिन अब यह मामला केवल पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गया है। विभिन्न सामाजिक और
राजनीतिक हलकों से इस पूरे प्रकरण में व्यापक जांच और जवाबदेही तय करने की मांग उठ रही है।
पुलिस कार्रवाई की सराहना, लेकिन उठे बड़े सवाल
मामले में नैनीताल पुलिस की कार्रवाई को सराहनीय बताया जा रहा है। हालांकि, सवाल यह भी उठाया जा रहा है कि यदि
अवैध गतिविधियां लंबे समय से संचालित हो रही थीं, तो संबंधित एजेंसियों और प्रशासन को इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं
मिली। कई लोगों का कहना है कि केवल कार्रवाई कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे नेटवर्क का खुलासा होना चाहिए।
अंकिता भंडारी मामले का भी किया जा रहा जिक्र
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अंकिता भंडारी हत्याकांड का भी उल्लेख किया जा रहा है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि उस घटना के
बाद सरकार और प्रशासन ने रिजॉर्टों की निगरानी और अवैध गतिविधियों पर सख्ती के जो दावे किए थे, वे पूरी तरह धरातल
पर दिखाई नहीं दिए। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी निगरानी होती तो ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाया जा
सकता था।
रिजॉर्ट प्रबंधन और नेटवर्क की भूमिका पर जांच की मांग
मामले में रिजॉर्ट प्रबंधन और कथित आयोजकों की भूमिका की जांच जारी है। आरोप है कि बिना उचित रिकॉर्ड और एंट्री के
लोगों को ठहराया गया। अब मांग उठ रही है कि केवल गिरफ्तार आरोपियों तक जांच सीमित न रहे, बल्कि पूरे नेटवर्क और
इससे जुड़े सभी लोगों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की जाए।
रसूखदारों की भूमिका पर भी उठे सवाल
मामले को लेकर यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि क्या जांच केवल सामने आए आरोपियों तक सीमित रहेगी या फिर उन
प्रभावशाली लोगों तक भी पहुंचेगी, जिन पर पर्दे के पीछे से संरक्षण देने के आरोप लगाए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि
निष्पक्ष जांच तभी मानी जाएगी जब पूरे नेटवर्क का खुलासा हो।
सरकार और प्रशासन से पारदर्शी जांच की मांग
सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए तथा यदि किसी स्तर
पर लापरवाही या संरक्षण की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि
देवभूमि की छवि बनाए रखने के लिए कानून का समान रूप से पालन होना जरूरी है।















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