पिरूल हस्तशिल्प प्रशिक्षण से बंदियों को मिलेगा स्वरोजगार का अवसर
उत्तराखंड सरकार की ‘एक जेल-एक उत्पाद’ पहल के तहत जिला कारागार पौड़ी में बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा
में एक नई शुरुआत की गई है। सोमवार को जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने तीन सप्ताह तक चलने वाले पिरूल क्राफ्ट
आधारित उद्यमिता विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य बंदियों को रोजगारपरक
कौशल प्रदान कर रिहाई के बाद उन्हें सम्मानजनक आजीविका से जोड़ना है।
पिरूल से तैयार होंगे आकर्षक हस्तशिल्प उत्पाद
प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन जिला उद्योग केंद्र के सहयोग से जनकल्याण सेवा समिति, कोटद्वार द्वारा किया जा रहा है।
प्रशिक्षण के दौरान बंदियों को पिरूल से वॉल हैंगिंग, बुके, सजावटी वस्तुएं, गृह उपयोगी सामग्री और अन्य हस्तशिल्प उत्पाद
बनाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि इन उत्पादों की बाजार में अच्छी मांग है और यह
भविष्य में बंदियों के लिए स्वरोजगार का माध्यम बन सकते हैं।
तैयार उत्पादों की होगी बायबैक व्यवस्था
जिलाधिकारी ने प्रशिक्षण के दौरान तैयार होने वाले उत्पादों की बायबैक व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उत्पादों की
बिक्री से होने वाली आय का उपयोग बंदी कल्याण और पुनर्वास कार्यक्रमों में किया जाएगा। इससे बंदियों को अपने कौशल का
आर्थिक लाभ भी मिलेगा और उनका उत्साह बढ़ेगा।
कौशल विकास से जुड़ेंगे अन्य रोजगारपरक प्रशिक्षण
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने जेल प्रशासन को भविष्य में कंप्यूटर टाइपिंग, कैंडल मेकिंग, हस्तशिल्प और अन्य
रोजगारपरक प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चरणबद्ध तरीके से संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बंदियों की रुचि और
क्षमता के अनुसार प्रशिक्षण उपलब्ध कराकर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है।
सुधारात्मक न्याय व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने कहा कि आपराधिक न्याय प्रणाली का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि व्यक्तियों में
सकारात्मक परिवर्तन लाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना भी है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम बंदियों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ उन्हें
अपराधमुक्त और सम्मानजनक जीवन की ओर प्रेरित करेंगे।
अधिकारियों ने किया प्रशिक्षण का निरीक्षण
कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी ने बंदियों द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पादों का निरीक्षण किया और उनसे संवाद कर प्रशिक्षण
से जुड़े अनुभव भी साझा किए। इस अवसर पर जेल अधीक्षक कौशल कुमार, जिला उद्योग केंद्र की प्रबंधक उपासना सिंह,
मास्टर ट्रेनर सरोज बिष्ट एवं प्रियतमा सहित जनकल्याण सेवा समिति और जेल प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहे।















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