उत्सव डोली के साथ माता मूर्ति मंदिर पहुंचे भगवान नारायण
विश्वप्रसिद्ध बदरीनाथ धाम में दो दिवसीय नर-नारायण महोत्सव का विधिवत शुभारंभ धार्मिक अनुष्ठानों और वैदिक परंपराओं के साथ हुआ।
महोत्सव के पहले दिन बदरीनाथ मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की गई।
सुबह भगवान नर-नारायण की उत्सव मूर्ति का महाभिषेक, पूजन, भोग और आरती संपन्न हुई।
मंदिर में आयोजित धार्मिक अनुष्ठान बदरीनाथ धाम के मुख्य पुजारी रावल अमरनाथ नंबूदरी की अगुवाई में संपन्न हुए।
इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान नर-नारायण के दर्शन किए और पूजा-अर्चना में हिस्सा लिया।
उत्सव डोली के साथ माता मूर्ति मंदिर के लिए रवाना हुए भगवान
धार्मिक अनुष्ठानों के बाद सुबह करीब 9:30 बजे भगवान नर-नारायण की उत्सव डोली श्रद्धालुओं और भक्तों के साथ माता मूर्ति मंदिर के लिए रवाना हुई।
भगवान की उत्सव डोली के दर्शन के लिए रास्ते में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी।
श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति की आधिकारिक जानकारी के अनुसार
माता मूर्ति मंदिर बदरीनाथ धाम से करीब 3 किलोमीटर दूर अलकनंदा नदी के दाहिने तट पर स्थित है।
यह मंदिर माता मूर्ति को समर्पित है और यहां धार्मिक परंपराओं के अनुसार विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
माता मूर्ति मंदिर में विशेष पूजा और भोग
माता मूर्ति मंदिर पहुंचने के बाद भगवान नर-नारायण की उत्सव मूर्ति का विशेष पूजन किया गया।
यहां नायब रावल सूर्यराग नंबूदरी की ओर से भगवान का महाभिषेक, पूजन और भोग अर्पित किया जाएगा।
नर-नारायण और माता मूर्ति से जुड़ी यह धार्मिक परंपरा बदरीनाथ धाम की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में शामिल है।
BKTC के अनुसार वामन द्वादशी के अवसर पर भगवान नारायण का माता मूर्ति मंदिर जाना विशेष धार्मिक महत्व रखता है।
भगवान नर-नारायण से जुड़ी है पौराणिक मान्यता
बदरीनाथ धाम की धार्मिक मान्यताओं में नर-नारायण का विशेष महत्व है।
श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अनुसार पौराणिक मान्यता में भगवान विष्णु ने धर्म के पुत्र के रूप में
नर और नारायण के रूप में अवतार लिया और इस क्षेत्र में जगत कल्याण के लिए तपस्या की।
इसी कारण बदरीनाथ धाम की धार्मिक परंपराओं में नर-नारायण की पूजा का विशेष स्थान है।
श्रद्धालुओं के लिए खास है नर-नारायण महोत्सव
नर-नारायण महोत्सव के दौरान बदरीनाथ धाम में धार्मिक वातावरण और भी भक्तिमय हो जाता है।
उत्सव डोली के साथ श्रद्धालु माता मूर्ति मंदिर तक पहुंचते हैं और विशेष पूजा-अर्चना में शामिल होते हैं।
मंदिर समिति की आधिकारिक वेबसाइट पर भी भगवान नर-नारायण जन्मोत्सव को श्रावण मास में
होने वाले विशेष आयोजनों में शामिल किया गया है, जबकि माता मूर्ति उत्सव को वामन द्वादशी के अवसर से जोड़ा गया है।
दो दिवसीय महोत्सव के दौरान बदरीनाथ धाम और माता मूर्ति मंदिर में धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-पाठ और भोग की परंपराएं जारी रहेंगी।
इससे धाम में पहुंचे तीर्थयात्रियों को इस विशेष धार्मिक आयोजन का साक्षी बनने का अवसर मिल रहा है।















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