अब 7 अक्टूबर को दिल्ली में होगी बड़ी मुलाकात
उत्तराखंड कांग्रेस में हरीश रावत की जनसंवाद यात्रा को लेकर सियासी हलचल बढ़ गई है।
पार्टी प्रभारी कुमारी सैलजा की आपत्ति के बावजूद रावत ने यात्रा जारी रखी।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत सोमवार को जसपुर से धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा पर निकले।
यात्रा काशीपुर, रामनगर और कालाढूंगी होते हुए हल्द्वानी पहुंची। रास्ते में पार्टी नेताओं और समर्थकों ने उनका स्वागत किया।
रावत के साथ दिखे कई बड़े नेता
यात्रा में पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह, विधायक तिलकराज बेहड़, हरीश धामी और आदेश चौहान समेत कई नेता नजर आए।
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल और पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा भी उनके साथ रहे।
कई वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी ने उत्तराखंड कांग्रेस के भीतर चल रही चर्चाओं को और हवा दी है।
हालांकि रावत ने यात्रा को कांग्रेस का आधिकारिक कार्यक्रम नहीं बताया।
सैलजा की चिट्ठी पर चुप, अब दिल्ली में देंगे जवाब
कुमारी सैलजा ने एक अक्टूबर को रावत को पत्र भेजकर यात्रा रोकने की सलाह दी थी।
उनका कहना था कि कार्यक्रम पर उनसे और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष से चर्चा नहीं हुई थी।
पार्टी ने इसे चुनाव से पहले समानांतर कार्यक्रम के तौर पर भी देखा।
रावत ने यात्रा के दौरान सैलजा की चिट्ठी पर कोई टिप्पणी नहीं की। उन्होंने कहा कि हाथ में तिरंगा है, लेकिन उन्होंने यात्रा को पार्टी कार्यक्रम नहीं बनाया है।
अब यात्रा पूरी करने के बाद रावत मंगलवार को देहरादून लौटेंगे। इसके बाद 7 अक्टूबर को दिल्ली जाकर केसी वेणुगोपाल और कुमारी सैलजा से मुलाकात करेंगे।
इस बैठक में वह अपनी स्थिति और यात्रा को लेकर अपना पक्ष रख सकते हैं।
रावत ने यह भी कहा कि बीमारी से उबरकर लौटने के बाद वह जनता और देवी-देवताओं के प्रति आभार जताने के लिए यात्रा पर निकले हैं।
उन्होंने ईडी और भाजपा को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की।















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