दिल्ली-NCR में मानसून के बीच H1N1 संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है।
वायरल और सांस संबंधी बीमारियों के बीच बढ़ते H1N1 मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है।
21 अगस्त तक दिल्ली में H1N1 के कुल मामले 1,777 पहुंच गए हैं। पिछले 24 घंटे में 159 नए मरीज सामने आए हैं।
H1N1 के बढ़ते मामलों पर हाई लेवल बैठक
संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने शुक्रवार को दिल्ली में H1N1 की स्थिति की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय बैठक बुलाई।
बैठक में दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी बढ़ाने और अस्पतालों की तैयारियां मजबूत रखने के निर्देश दिए हैं।
फिलहाल अधिकारियों ने लोगों से घबराने के बजाय सावधानी बरतने की अपील की है।
डॉक्टरों में भी संक्रमण की खबर
दिल्ली-NCR में फ्लू जैसे लक्षण वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है।
कुछ मरीजों में ऑक्सीजन लेवल कम होने और सांस लेने में परेशानी की शिकायत भी सामने आई है।
वहीं, कुछ डॉक्टरों और एक सरकारी अस्पताल के वरिष्ठ अधिकारी के H1N1 पॉजिटिव होने की जानकारी भी सामने आई है।
H1N1 कैसे फैलता है?
H1N1 इंफ्लूएंजा A वायरस का एक प्रकार है। यह संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने और सांस लेने से निकलने वाले कणों के संपर्क में आने से फैल सकता है।
भीड़भाड़ वाली जगहों और संक्रमित व्यक्ति के करीब रहने से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए फ्लू जैसे लक्षण होने पर दूसरों से दूरी रखना जरूरी है।
H1N1 के प्रमुख लक्षण
H1N1 में अचानक बुखार, सूखी खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, शरीर में दर्द, कमजोरी और थकान जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
कुछ लोगों में नाक बहना, नाक बंद होना, उल्टी और दस्त भी हो सकते हैं।
सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द या दबाव, अत्यधिक कमजोरी, भ्रम की स्थिति या होंठ-चेहरा नीला पड़ना गंभीर चेतावनी संकेत हो सकते हैं।
ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
किन लोगों को ज्यादा खतरा?
छोटे बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों में फ्लू गंभीर हो सकता है।
डायबिटीज, अस्थमा और फेफड़ों या हृदय से जुड़ी बीमारी वाले लोगों को भी विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
इलाज में खुद से दवा लेने से बचें
H1N1 वायरल संक्रमण है, इसलिए एंटीबायोटिक सीधे वायरस पर असर नहीं करते। कुछ मरीजों में डॉक्टर की सलाह पर एंटीवायरल दवाएं दी जा सकती हैं।
खुद से एंटीवायरल या एंटीबायोटिक लेना उचित नहीं है। इलाज मरीज की उम्र, लक्षण और बीमारी की गंभीरता के आधार पर डॉक्टर तय करते हैं।
H1N1 से बचाव के लिए क्या करें?
फ्लू जैसे लक्षण होने पर घर पर आराम करें और दूसरों के संपर्क से बचें। खांसते या छींकते समय मुंह और नाक ढकें।
हाथों को साबुन से नियमित धोएं और भीड़भाड़ वाली जगहों पर जरूरत के अनुसार मास्क का इस्तेमाल करें।
इंफ्लूएंजा वैक्सीन भी संक्रमण और गंभीर बीमारी के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती है।
वैक्सीनेशन को लेकर डॉक्टर से सलाह ली जा सकती है।
डेंगू और H1N1 को न समझें एक जैसा
मानसून में डेंगू और H1N1 दोनों के मामले सामने आ सकते हैं।
दोनों में बुखार, कमजोरी और शरीर में दर्द जैसे कुछ लक्षण समान हो सकते हैं, लेकिन दोनों बीमारियों के कारण और इलाज अलग हैं।
इसलिए लगातार बुखार या हालत बिगड़ने पर खुद से बीमारी तय करने के बजाय डॉक्टर से जांच और सलाह लेना जरूरी है।
पैनिक नहीं, सावधानी जरूरी
दिल्ली में H1N1 के मामले बढ़ना चिंता का विषय जरूर है, लेकिन हर संक्रमण गंभीर नहीं होता।
समय पर पहचान, उचित इलाज और संक्रमण से बचाव के उपाय सबसे महत्वपूर्ण हैं।
खासकर सांस लेने में परेशानी या ऑक्सीजन लेवल गिरने जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
ऐसे मामलों में तुरंत चिकित्सकीय मदद लेना जरूरी है।
















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