अल्मोड़ा जिले के स्याल्दे क्षेत्र में गुलदार के हमले की घटना सामने आई है।
फूलाई गांव में घर के अंदर घुसे गुलदार ने 88 वर्षीय वृद्धा पर हमला कर दिया।
हमले में वृद्धा के सिर और हाथों पर चोटें आई हैं। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है।
रात तीन बजे घर में घुसा गुलदार
ग्राम पंचायत गुमटी के फूलाई गांव निवासी परुली देवी रात में घर पर सो रही थीं।
रात करीब तीन बजे गुलदार अचानक घर के अंदर घुस आया। गुलदार ने सो रही वृद्धा पर हमला कर दिया। उसने उनके सिर पर वार किया और हाथों पर पंजे मारे।
वृद्धा के शोर मचाने पर घर में सो रही उनकी बहू जाग गई। कमरे में गुलदार को देखकर वह घबरा गई।
इसके बाद उन्होंने आसपास के ग्रामीणों को घटना की जानकारी दी।
सूचना मिलते ही ग्रामीण मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों ने शोर मचाकर किसी तरह गुलदार को घर से बाहर भगाया।
इसके बाद घायल परुली देवी को भिकियासैंण अस्पताल ले जाया गया।

रामनगर रेफर की गईं वृद्धा
भिकियासैंण अस्पताल में डॉक्टरों ने वृद्धा का प्राथमिक उपचार किया।
इसके बाद बेहतर उपचार और स्वास्थ्य परीक्षण के लिए उन्हें रामनगर रेफर कर दिया गया। परिजनों के अनुसार, वृद्धा की हालत फिलहाल खतरे से बाहर है।
घटना के बाद ग्रामीणों में गुलदार को लेकर डर बढ़ गया है। लोगों का कहना है कि क्षेत्र में जंगली जानवरों की सक्रियता लगातार बढ़ रही है।
वन विभाग ने शुरू की गश्त
घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम प्रभावित क्षेत्र में पहुंची। जौरासी रेंज के रेंजर आशुतोष जोशी ने अस्पताल पहुंचकर घायल वृद्धा का हाल जाना।
इसके बाद वन विभाग ने प्रभावित क्षेत्र में गश्त शुरू कर दी। टीम गुलदार की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रही है। रेंजर ने बताया कि जल्द ही क्षेत्र में पिंजरा लगाया जाएगा।
ग्रामीणों ने की सुरक्षा बढ़ाने की मांग
ग्रामीणों ने वन विभाग से क्षेत्र में निगरानी बढ़ाने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि गुलदार की सक्रियता से लोगों की सुरक्षा खतरे में है।
उन्होंने प्रभावित इलाकों में नियमित गश्त कराने की मांग की है।
साथ ही गुलदार को पकड़ने के लिए जल्द कार्रवाई करने की अपील की है।
बाड़ेछीना में भी ग्रामीण पर कर चुका है हमला
गौरतलब है कि बीते दिनों बाड़ेछीना क्षेत्र के छानी गांव में भी गुलदार ने हमला किया था।
इस हमले में ग्रामीण दीवान सिंह गंभीर रूप से घायल हुए थे।
गुलदार के हमले में उनके हाथ और पीठ पर चोटें आई थीं। इसके बाद उन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल लाया गया था।
घटना के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग से पिंजरा लगाने की मांग की थी। वनकर्मियों ने क्षेत्र में नियमित गश्त भी शुरू की थी।















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