वेंटिलेटर बंद होने से मचा हड़कंप
दून अस्पताल की इमरजेंसी में गुरुवार रात अचानक बिजली गुल होने से कुछ देर के लिए ऐसा संकट खड़ा हो गया,
जहां मशीनों की रफ्तार सीधे बच्चों की सांसों से जुड़ गई।
पीकू वार्ड में भर्ती 10 बच्चों के वेंटिलेटर बिजली जाने के बाद बंद हो गए, जिसके बाद अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई।
घटना रात करीब 11:20 बजे की बताई जा रही है।
इमरजेंसी-ओटी भवन की बिजली जाते ही स्वास्थ्यकर्मियों को उम्मीद थी कि ऑटोमैटिक जनरेटर तुरंत चालू हो जाएगा। लेकिन कुछ मिनट गुजरने के बाद भी बिजली बहाल नहीं हुई।

जनरेटर का पैनल हुआ हैंग, बंद हो गए वेंटिलेटर
तकनीशियन को सूचना देने पर जांच में पता चला कि जनरेटर का पैनल हैंग हो गया था।
इसी दौरान पीकू वार्ड में वेंटिलेटर बंद होने से गंभीर स्थिति पैदा हो गई।
वार्ड में उस समय कुल 10 बच्चे भर्ती थे। इनमें से तीन बच्चों को तत्काल एंबू बैग के जरिए ऑक्सीजन देनी पड़ी, ताकि बिजली आपूर्ति बहाल होने तक उनकी सांसों को सामान्य रखा जा सके।
कुछ मिनटों ने बढ़ाई अस्पताल की चिंता
बिजली गुल होने और बैकअप सिस्टम के काम न करने के बीच स्वास्थ्यकर्मियों को तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ी।
एंबू बैग से बच्चों को ऑक्सीजन देने के साथ तकनीकी टीम जनरेटर की खराबी दूर करने में जुटी रही।
घटना ने अस्पताल की पावर बैकअप व्यवस्था और आपातकालीन तैयारियों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
खासकर ऐसे वार्ड में, जहां वेंटिलेटर और दूसरे जीवनरक्षक उपकरण लगातार बिजली पर निर्भर रहते हैं।
सवाल सिर्फ बिजली का नहीं, बैकअप सिस्टम की तैयारी का भी
अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर बिजली जाने की स्थिति असामान्य नहीं है, लेकिन ऐसी स्थिति में बैकअप सिस्टम का तत्काल काम करना बेहद जरूरी होता है।
दून अस्पताल की इस घटना में जनरेटर का पैनल हैंग होने से कुछ समय के लिए गंभीर स्थिति बन गई।
हालांकि, स्वास्थ्यकर्मियों की तत्परता से बच्चों को वैकल्पिक ऑक्सीजन सपोर्ट दिया गया और किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है।
लेकिन घटना ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि अगर बिजली कटौती लंबी होती तो स्थिति कितनी गंभीर हो सकती थी?















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