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चीनी के बढ़े भाव ने बढ़ाई टेंशन! ₹62 किलो पहुंची कीमत

आखिर क्यों महंगी हो रही है चीनी?

चाय की प्याली हो या त्योहारों की मिठाई, चीनी अब हर घर के बजट को प्रभावित करने लगी है।

पिछले कुछ हफ्तों में चीनी की कीमतों में लगातार तेजी देखने को मिली है।

उपलब्ध साप्ताहिक आंकड़ों के मुताबिक 24 जुलाई को करीब 48.50 रुपये किलो रही चीनी 21 अगस्त तक 62.45 रुपये किलो पहुंच गई।

यानी करीब एक महीने में कीमत में लगभग 14 रुपये प्रति किलो का उछाल आया है।

ऐसे समय में जब गणेश चतुर्थी, दशहरा और दीपावली जैसे बड़े त्योहार आने वाले हैं, चीनी की बढ़ती कीमत ने आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है।

एक महीने में ऐसे बढ़ी चीनी की कीमत

तारीखकीमत प्रति किलो
24 जुलाई 2026₹48.50
31 जुलाई 2026₹51.99
7 अगस्त 2026₹55.48
14 अगस्त 2026₹58.97
21 अगस्त 2026₹62.45

यानी 28 दिन में कीमत करीब 29% बढ़ी।

आखिर चीनी महंगी क्यों हुई

इस सवाल का जवाब किसी एक वजह में नहीं छिपा है। चीनी की कीमत बढ़ने के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं।

कीमत बढ़ने की बड़ी वजहें

  • इथेनॉल के लिए गन्ने/चीनी का डायवर्जन
  • चीनी का उत्पादन अनुमान से कम रहना
  • गन्ने की फसल पर मौसम का असर
  • कुछ इलाकों में फसल संबंधी बीमारी
  • त्योहारों से पहले मांग बढ़ना
  • बाजार में स्टॉक को लेकर चिंता
  • जमाखोरी और सट्टेबाजी की आशंका
  • अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की कीमत बढ़ना

बारिश ने भी बिगाड़ा गन्ने का गणित

महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में पिछले साल मौसम और भारी बारिश का असर फसल पर पड़ा।

वहीं उत्तर प्रदेश में गन्ने की फसल को बीमारी से भी नुकसान पहुंचने की बात सामने आई।

इसका सीधा असर चीनी उत्पादन के अनुमान पर पड़ा।

2025-26 में उत्पादन का शुरुआती अनुमान करीब 343 लाख टन था, जिसे बाद में घटाकर लगभग 306 लाख टन किया गया।

यानी उत्पादन घटने की आशंका ने बाजार में भविष्य की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी।

क्या इथेनॉल भी चीनी की कीमत बढ़ा रहा है?

यह सबसे बड़ा सवाल है।

गन्ने से चीनी के साथ-साथ इथेनॉल भी बनाया जाता है। ऐसे में जब गन्ने या चीनी का एक हिस्सा इथेनॉल उत्पादन में जाता है, तो बाजार में उपलब्ध चीनी की मात्रा प्रभावित हो सकती है।

हालांकि सरकार इस बात से सहमत नहीं है कि सिर्फ इथेनॉल की वजह से चीनी महंगी हुई है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2025-26 में करीब 28 लाख टन चीनी इथेनॉल के लिए डायवर्ट की गई, जो पिछले कुछ वर्षों की तुलना में कम है।

मतलब साफ है:

इथेनॉल = एक कारण, लेकिन अकेली वजह नहीं।

मौसम, कम उत्पादन, त्योहारों की मांग और बाजार की गतिविधियां भी कीमतों पर दबाव डाल रही हैं।

त्योहारों से पहले बढ़ी मांग

अगस्त से नवंबर तक देश में त्योहारों का लंबा दौर चलता है।

गणेश चतुर्थी → दशहरा → दिवाली

इन त्योहारों पर मिठाइयों, बेकरी उत्पादों, पेय पदार्थों और दूसरे खाद्य उत्पादों में चीनी की मांग बढ़ जाती है।

ऐसे में बाजार में पहले से ही सप्लाई को लेकर चिंता हो तो बढ़ी हुई मांग कीमतों को और ऊपर धकेल सकती है।

क्या चीनी की कमी हो गई है?

नहीं। यही सबसे महत्वपूर्ण बात है।

सरकार और उद्योग जगत का कहना है कि देश में घरेलू खपत पूरी करने के लिए पर्याप्त चीनी उपलब्ध है।

भारत में सालाना चीनी की खपत लगभग 2.6 से 2.8 करोड़ टन के बीच रहती है।

इसके बावजूद कीमतें बढ़ने की वजह भविष्य की सप्लाई को लेकर बाजार की चिंता और बढ़ी हुई मांग है।

जमाखोरी पर सरकार सख्त

कीमतों में अनावश्यक तेजी रोकने के लिए सरकार ने चीनी के स्टॉक को लेकर भी कदम उठाए हैं।

सरकार ने:

  • कारोबारियों के लिए स्टॉक लिमिट तय की।
  • बड़े खरीदारों के स्टॉक पर भी नियंत्रण लगाया।
  • बाजार में उपलब्धता बढ़ाने के लिए 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात को मंजूरी दी।
  • नए सीजन की पेराई जल्द शुरू कराने की दिशा में कदम उठाए।

सरकार का उद्देश्य है कि त्योहारों के दौरान बाजार में चीनी की कमी जैसी स्थिति न बने।

सिर्फ भारत नहीं, दुनिया में भी चीनी महंगी

चीनी की कीमतों में तेजी सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कीमतें बढ़ी हैं।

30 जून को अंतरराष्ट्रीय चीनी कीमत करीब 474 डॉलर प्रति टन थी, जो 20 अगस्त तक बढ़कर लगभग 552 डॉलर प्रति टन हो गई।

यानी वैश्विक बाजार में भी करीब 16% से ज्यादा की तेजी देखी गई।

ब्राजील और थाईलैंड जैसे बड़े उत्पादक देशों में उत्पादन प्रभावित होने से वैश्विक सप्लाई पर भी दबाव बढ़ा है।

एक नजर में समझिए पूरी कहानी

कारणचीनी की कीमत पर असर
कम उत्पादन⬆️ कीमत बढ़ी
बारिश और मौसम⬆️ सप्लाई पर दबाव
फसल में बीमारी⬆️ उत्पादन प्रभावित
त्योहारों की मांग⬆️ खपत बढ़ी
जमाखोरी/सट्टेबाजी⬆️ बाजार में तेजी
इथेनॉल डायवर्जन⬆️ उपलब्ध चीनी पर असर
वैश्विक कीमतें⬆️ आयात लागत पर दबाव
सरकारी आयात⬇️ कीमत नियंत्रित करने की कोशिश

क्या आगे और महंगी होगी चीनी

अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि चीनी की कीमत कितनी ऊपर जाएगी। आने वाले दिनों में तीन चीजें सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण रहेंगी-

1. घरेलू बाजार में स्टॉक कितना उपलब्ध रहता है।
2. नई गन्ना पेराई कब शुरू होती है।
3. त्योहारों के दौरान मांग कितनी बढ़ती है।

अगर नई सप्लाई समय पर बाजार में पहुंचती है और सरकार के आयात से उपलब्धता बढ़ती है तो कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।

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