250 से ज्यादा लोग बीमार, दो मौतों के बाद हाईकोर्ट ने अधिकारियों को लगाई फटकार
ज्योलीकोट और आसपास के गांवों में दूषित पेयजल से फैली बीमारी पर उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।
क्षेत्र में अब तक 250 से ज्यादा लोग बीमार पड़े हैं, जबकि दो लोगों की मौत हो चुकी है।
अधिवक्ता रवि बिष्ट की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान डीएम ललित मोहन रयाल, सीएमओ डॉ. रश्मि पंत और जल संस्थान के अधिकारी कोर्ट में पेश हुए।
अधिकारियों ने माना कि पुराने कूड़ा खड्ड के पास सीवर का पानी पेयजल स्रोत में मिल गया था।
इस पर कोर्ट ने अधिकारियों की लापरवाही पर नाराजगी जताई।
कोर्ट ने कहा कि समय रहते पेयजल और सीवर लाइनों की मरम्मत होती तो ग्रामीणों को इस संकट का सामना नहीं करना पड़ता।
20 से 25 जल स्रोतों के सैंपल लेने के निर्देश
हाईकोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नैनीताल और आसपास के 20 से 25 जल स्रोतों के सैंपल लेने के निर्देश दिए हैं।
इसकी रिपोर्ट छह दिन में कोर्ट में पेश करनी होगी।
डीएम को राहत कार्यों की खुद निगरानी करने और प्रभावित क्षेत्रों में टैंकरों से शुद्ध पानी पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।
सीएमओ ने बताया कि प्रभावित गांवों में आठ डॉक्टरों की टीम, एक एंबुलेंस और मेडिकल स्टाफ तैनात किया गया है। घर-घर क्लोरीन टैबलेट और ओआरएस भी बांटे जा रहे हैं।
स्वास्थ्य सुविधाओं पर कोर्ट ने कहा कि जरूरत पड़ने पर बाहर से विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम बुलाई जाए।
मरीजों की जांच के लिए डीएम ने निजी लैबों में टेस्ट कराने को चार लाख रुपये जारी किए हैं।
ज्योलीकोट, गांजा, वीरभट्टी, छीणा, बेलुवाखान और सरियाताल क्षेत्र में बीमारी का असर बताया गया है।
यहां डायरिया, पेचिश, टाइफाइड, हैजा और पीलिया के मरीज सामने आए हैं।
















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