जल से माइक्रोप्लास्टिक हटाने की पर्यावरण-अनुकूल विधियों पर शोध के लिए मिला सम्मान
हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के शोधार्थी अब्दुल वारिश को 21वें उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी कांग्रेस
(USSTC-2026) में यंग साइंटिस्ट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।
उन्हें यह पुरस्कार जल से माइक्रोप्लास्टिक हटाने के लिए पौधों पर आधारित पर्यावरण-अनुकूल विधियों के विकास संबंधी शोध के लिए मिला।

पौधों पर आधारित विधियों से माइक्रोप्लास्टिक हटाने पर शोध
अब्दुल वारिश का शोध जल प्रदूषण कम करने और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को प्लास्टिक प्रदूषण से
होने वाले नुकसान से बचाने के लिए टिकाऊ समाधान विकसित करने पर केंद्रित है।
उन्होंने माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण और उसके पर्यावरणीय प्रभावों पर प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिकाओं में शोध एवं समीक्षा लेख भी प्रकाशित किए हैं।
डॉ. जसपाल सिंह चौहान के निर्देशन में हुआ शोध
यह शोध विश्वविद्यालय के हिमालयी जलीय जैवविविधता विभाग की एक्वाटिक इकोलॉजी प्रयोगशाला में
विभागाध्यक्ष एवं शोध निर्देशक डॉ. जसपाल सिंह चौहान के मार्गदर्शन में किया गया।
प्रयोगशाला में जलीय पारिस्थितिकी तंत्र में माइक्रोप्लास्टिक की उपस्थिति, वितरण और उसके प्रभावों का अध्ययन किया जा रहा है।
साथ ही, जल से माइक्रोप्लास्टिक हटाने की पर्यावरण-अनुकूल विधियों का विकास और मूल्यांकन भी किया जाता है।
हिमालयी जल स्रोतों की गुणवत्ता पर भी अध्ययन
विभाग में हिमालयी क्षेत्रों के झरनों और नदियों के जल की गुणवत्ता, जलीय जैवविविधता तथा
जल संसाधनों पर पर्यावरणीय दबावों के प्रभावों का भी आकलन किया जा रहा है।
इन अध्ययनों का उद्देश्य जल संरक्षण और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र की बेहतर समझ विकसित करना है।
शिक्षकों ने दी बधाई
अब्दुल वारिश ने अपनी उपलब्धि का श्रेय शोध निर्देशक डॉ. जसपाल सिंह चौहान के मार्गदर्शन, सहयोग
और प्रोत्साहन को दिया। विभाग के शिक्षक डॉ. कौशल और डॉ. प्रशांत ने भी उन्हें बधाई देते हुए आगामी शोध कार्यों के लिए शुभकामनाएं दीं।
यह सम्मान पर्यावरण संरक्षण और जल प्रदूषण की चुनौती से निपटने की दिशा में युवा शोधकर्ताओं के योगदान को रेखांकित करता है।

















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