15 दिन में चुनाव कराने का आदेश, निलंबन और कारण बताओ नोटिस वापस; संविधान मंजूरी की समयसीमा तय नहीं होने से छात्र असंतुष्ट
जामिया मिलिया इस्लामिया में करीब दो दशक बाद छात्रसंघ चुनाव कराने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने सोमवार, 26 अक्टूबर को आदेश जारी कर कहा कि छात्रसंघ के संविधान को
मंजूरी मिलने के 15 दिन के भीतर चुनाव कराए जाएंगे।
प्रदर्शन के दौरान छात्रों को जारी निलंबन आदेश और कारण बताओ नोटिस भी वापस ले लिए गए हैं।
इसके बावजूद छात्र आंदोलन खत्म करने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि चुनाव की प्रक्रिया के लिए स्पष्ट समयसीमा वाला लिखित आश्वासन जरूरी है।
2006 से नहीं हुए छात्रसंघ चुनाव
जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्रसंघ को वर्ष 2006 में भंग कर दिया गया था।
इसके बाद से छात्र निर्वाचित छात्रसंघ की बहाली और चुनाव कराने की मांग उठाते रहे हैं।
मौजूदा आंदोलन 12 अक्टूबर से जारी है।
छात्रों ने चुनाव की निश्चित समयसीमा, अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने और प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा कर्मियों के व्यवहार की जांच की मांग की थी।
21 अक्टूबर को विश्वविद्यालय ने छात्रसंघ का संविधान तैयार करने के लिए समिति गठित की थी।
लेकिन छात्र इससे संतुष्ट नहीं हुए और चुनाव की तारीख तय करने की मांग पर आंदोलन जारी रखा।

भूख हड़ताल जारी, लिखित भरोसे पर अड़े छात्र
विश्वविद्यालय के आदेश में प्रदर्शन के दौरान जारी निलंबन और कारण बताओ नोटिस वापस लेने के साथ
सुरक्षा कर्मियों के आचरण की जांच के लिए समिति गठित करने की बात भी कही गई है।
हालांकि, संविधान को मंजूरी देने की कोई निश्चित तारीख नहीं बताई गई है। यही छात्रों की नाराजगी की प्रमुख वजह है।
इंडियन एक्सप्रेस और हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 26 अक्टूबर को आंदोलन 14वें दिन में पहुंच गया था।
चार छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बताए गए।
छात्रों ने प्रशासन के आदेश को अधूरा बताते हुए कहा कि वे स्पष्ट लिखित आश्वासन मिलने तक आंदोलन जारी रखेंगे।
उन्होंने प्रॉक्टर और सुरक्षा सलाहकार के इस्तीफे की मांग भी उठाई है।
इस बीच विश्वविद्यालय ने विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रशासन के खिलाफ कथित मानहानिकारक बयानों
और सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर सार्वजनिक माफी देने तथा पोस्ट हटाने की शर्त भी रखी है।
ऐसे में चुनाव का आदेश जारी होने के बावजूद छात्रसंघ की बहाली और आंदोलन खत्म होने पर अनिश्चितता बनी हुई है।
















Leave a Reply