बागेश्वर में एक और शिक्षिका के दस्तावेजों में गड़बड़ी
बागेश्वर में यूटीईटी अंकपत्र का अनुक्रमांक दूसरे अभ्यर्थी का निकला, जनवरी में हुई थी नियुक्ति
उत्तराखंड में सरकारी शिक्षक बनने के लिए फर्जी प्रमाणपत्रों के इस्तेमाल के मामले लगातार सामने आ रहे हैं।
बागेश्वर में अब एक और शिक्षिका के यूटीईटी अंकपत्र में गड़बड़ी मिली है।
जांच में अंकपत्र पर दर्ज अनुक्रमांक किसी दूसरे अभ्यर्थी का पाया गया।
शिक्षा विभाग ने शिक्षिका के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई शुरू कर दी है। जिले में इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आ चुके हैं।
सत्यापन में खुली प्रमाणपत्र की गड़बड़ी
राजकीय प्राथमिक विद्यालय ग्वाड़ी में तैनात शिक्षिका बबीता पुत्री फकीर राम की नियुक्ति इसी वर्ष जनवरी में हुई थी।
नियुक्ति के बाद उनके शैक्षिक प्रमाणपत्रों का सत्यापन उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद, रामनगर से कराया गया।
जांच के दौरान यूटीईटी अंकपत्र पर दर्ज अनुक्रमांक किसी दूसरे अभ्यर्थी का निकला।
इससे प्रमाणपत्र की प्रामाणिकता पर सवाल उठे हैं।
प्रभारी मुख्य शिक्षा अधिकारी आशा राम के अनुसार, बोर्ड की जांच में अनुक्रमांक दूसरे अभ्यर्थी का होने की पुष्टि हुई है।
शिक्षिका के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।
प्रदेश में 80 शिक्षकों के दस्तावेज फर्जी मिलने का मामला
फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर शिक्षक बनने के मामले केवल बागेश्वर तक सीमित नहीं हैं।
अक्टूबर 2026 में हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान सामने आई जानकारी के अनुसार, प्रदेश में सत्यापन के दौरान
80 शिक्षकों के दस्तावेज फर्जी या कूटरचित पाए गए थे।
सरकार ने अदालत को संबंधित शिक्षकों के विरुद्ध कार्रवाई किए जाने की जानकारी दी थी।
वहीं, अलग-अलग वर्षों की रिपोर्टों में जून 2024 में 65 शिक्षकों की सेवाएं समाप्त किए जाने
और अक्टूबर 2024 में 69 शिक्षकों के प्रमाणपत्र फर्जी पाए जाने की जानकारी सामने आई थी।
अक्टूबर 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें से 52 शिक्षकों को बर्खास्त किया जा चुका था।
ये अलग-अलग समय के आंकड़े हैं, इसलिए इन्हें जोड़कर कुल मामलों की संख्या तय नहीं की जा सकती।
बागेश्वर और अल्मोड़ा में भी हुई कार्रवाई
अक्टूबर 2026 में बागेश्वर में यूटीईटी प्रमाणपत्रों की जांच के बाद 10 प्राथमिक शिक्षकों की सेवाएं समाप्त किए जाने की खबर सामने आई थी।
अब शिक्षिका बबीता के प्रमाणपत्र में गड़बड़ी का मामला सामने आया है।
इसी महीने अल्मोड़ा में भी यूटीईटी प्रमाणपत्र फर्जी पाए जाने पर तीन प्राथमिक शिक्षकों की सेवाएं समाप्त किए जाने की जानकारी सामने आई थी।
शिक्षक भर्ती में कथित अनियमितताओं की जांच के तहत एसआईटी ने वर्ष 2012 से 2016 के बीच नियुक्त 9,602 शिक्षकों के प्रमाणपत्रों के सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की थी।
प्रकाशित रिपोर्टों में करीब 80 शिक्षकों के विरुद्ध 68 मुकदमों का भी उल्लेख किया गया है।
सत्यापन लंबित होने का अर्थ फर्जी प्रमाणपत्र नहीं
हाईकोर्ट में पेश जानकारी के अनुसार, 17 नवंबर 2025 तक प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत 33,055 शिक्षकों में से 24,820 के दस्तावेजों का सत्यापन किया जा चुका था।
वहीं, 7,553 कार्यरत और 682 सेवानिवृत्त शिक्षकों का सत्यापन लंबित था।
हालांकि, सत्यापन लंबित होने का अर्थ यह नहीं है कि इन सभी शिक्षकों के प्रमाणपत्र फर्जी हैं।
लगातार सामने आ रहे मामलों के बीच शिक्षा विभाग के सामने अब जिलेवार कार्रवाई का स्पष्ट ब्योरा उपलब्ध कराने की चुनौती है।
कितने शिक्षकों की सेवाएं समाप्त हुईं, कितनों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज हुई
और कितने मामले जांच के अधीन हैं, इसकी एक ही तारीख की अद्यतन समेकित जानकारी सामने आना जरूरी है।
इससे फर्जी प्रमाणपत्रों के मामलों में कार्रवाई की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।















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