खुशमन और स्टोर नार्जरी ने मारी बाजी
उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्र गुंजी में ऊंचे पहाड़, पथरीले रास्ते और माइनस तापमान साइकिलिस्टों के हौसले की परीक्षा लेते रहे।
आदि कैलाश परिक्रमा रन 2.0 के अंतिम दिन आयोजित माउंटेन बाइकिंग (MTB) रेस में देशभर से पहुंचे
प्रतिभागियों ने दुर्गम रास्तों पर दमखम दिखाया।
50 किलोमीटर पुरुष वर्ग में खुशमन और महिला वर्ग में स्टोर नार्जरी ने पहला स्थान हासिल किया।
वहीं, 25 किलोमीटर पुरुष वर्ग में प्रज्वल चौहान अव्वल रहे।
गुंजी में 3,200 मीटर की ऊंचाई पर चुनौती
गुंजी में आयोजित यह रेस 24 से 26 अक्टूबर तक चले आदि कैलाश परिक्रमा रन 2.0 का हिस्सा रही।
आयोजन उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड और रन2लाइव की ओर से किया गया।
प्रतियोगिता में 50 किलोमीटर की ओपन रेस और 25 किलोमीटर की जूनियर रेस रखी गई थी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पत्नी गीता धामी ने प्रतिभागियों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
पथरीले रास्तों और ऊंचाई वाले कठिन ट्रैक पर साइकिलिस्टों को गति के साथ संतुलन और सहनशक्ति भी बनाए रखनी पड़ी।
50 किमी पुरुष वर्ग में खुशमन प्रथम
पुरुष वर्ग में खुशमन ने 1 घंटे 59 मिनट में रेस पूरी कर पहला स्थान हासिल किया।
प्रकाश थापा 2 घंटे 2 मिनट के समय के साथ दूसरे और थॉमाचन 2 घंटे 2 मिनट 56 सेकंड में तीसरे स्थान पर रहे।
महिला वर्ग में स्टोर नार्जरी ने 2 घंटे 45 मिनट 7 सेकंड में दूरी पूरी कर बाजी मारी।
अवनी दर्ज्याल महज दो सेकंड पीछे रहीं और दूसरे स्थान पर आईं। स्वाति बोनाल ने 4 घंटे 15 मिनट 45 सेकंड के समय के साथ तीसरा स्थान हासिल किया।
25 किमी रेस में प्रज्वल चौहान अव्वल
25 किलोमीटर की रेस में प्रज्वल चौहान ने 1 घंटे 27 मिनट में दूरी तय कर पहला स्थान प्राप्त किया।
अश्विन राठौर 1 घंटे 29 मिनट के साथ दूसरे और भानु पायल 1 घंटे 41 मिनट में रेस पूरी कर तीसरे स्थान पर रहे।
सीमांत पर्यटन को बढ़ावा देने की पहल
आयोजन के पहले दिन 24 अक्टूबर को 70 और 42 किलोमीटर की दौड़ हुई।
दूसरे दिन 25 अक्टूबर को 21, 10 और 5 किलोमीटर की श्रेणियों में प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
अंतिम दिन MTB रेस के साथ आयोजन संपन्न हुआ।
इस आयोजन का मकसद केवल खेल प्रतियोगिता तक सीमित नहीं है।
इसके जरिए आदि कैलाश और व्यास घाटी की प्राकृतिक सुंदरता, स्थानीय संस्कृति
और सीमांत गांवों की पर्यटन संभावनाओं को पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।
ऊंचाई वाले दुर्गम इलाकों में ऐसे आयोजन साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय स्तर पर पर्यटन गतिविधियों के अवसर भी बढ़ा सकते हैं।
















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