कमल रावत
ओणी गांव में महिला पर हमला, दर्द से तड़प उठी घाटी
गढ़वाल की खंडाह घाटी इन दिनों भय, दहशत और असुरक्षा के साये में जी रही है।
आदमखोर बाघ का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है और लोग शाम ढलते ही घरों में कैद होने को मजबूर हैं।
ताजा घटना ओणी गांव की है, जहां रविवार शाम करीब छह बजे आदमखोर बाघ ने महिला पर हमला कर दिया।
हमले के बाद महिला दर्द से बुरी तरह बिलखती रही।
पति उन्हें संभालने की कोशिश करता रहा, लेकिन दर्द इतना असहनीय था कि वह शांत नहीं हो पा रही थीं।
किसी तरह ग्रामीणों की मदद से उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनकी हालत नाजुक बनी हुई है।
आदमखोर के हमले का दर्द क्यों होता है भयावह
ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आदमखोर बाघ के हमले का दर्द सामान्य जख्म जैसा नहीं होता।
उसके तेज दांत और नाखून शरीर को गहराई तक चीर देते हैं।
पीड़ित को ऐसा महसूस होता है जैसे शरीर में आग जल रही हो।
घाव तेजी से सूजने लगते हैं, सांस घुटने लगती है और तीव्र बेचैनी इंसान को तोड़ देती है।
कई बार घायल व्यक्ति मानसिक रूप से भी इतना टूट जाता है कि उसे हर पल मौत सामने दिखाई देने लगती है।
यही वजह है कि आदमखोर के हमले से बच जाना भी किसी बड़ी त्रासदी से कम नहीं माना जाता।
सात लोगों को बना चुका है निवाला
खंडाह घाटी में अब तक सात लोग इस आदमखोर का शिकार बन चुके हैं।
बाघ अब बेहद शातिर हो चुका है और लगातार इलाके बदल-बदलकर वारदात कर रहा है।
बताया जा रहा है कि करीब चालीस किलोमीटर के दायरे में वह घूमकर हमला करता है।
यह तीसरी घटना है जब कोई व्यक्ति उसके चंगुल से घायल अवस्था में जीवित बच पाया है।
इससे पहले कई परिवार अपने प्रियजनों को हमेशा के लिए खो चुके हैं।
बिजली संकट, जंगल की आग और अब बाघ का आतंक
पहाड़ के लोग पहले ही बिजली संकट और जंगलों की आग जैसी परेशानियों से जूझ रहे हैं।
ऐसे में आदमखोर बाघ का आतंक लोगों की जिंदगी को और भयावह बना रहा है।
गांवों में शाम होते ही सन्नाटा पसर जाता है। महिलाएं खेतों में जाने से डर रही हैं और बच्चों को अकेले बाहर नहीं निकलने दिया जा रहा।
गढ़वाल की पुरानी कहावत —
“मुंड आग पिछवाड़ा बाघ”
आज खंडाह घाटी की सच्चाई बन चुकी है।
वन विभाग पर उठ रहे सवाल
लगातार हो रही घटनाओं के बावजूद ग्रामीणों को अब तक स्थायी समाधान नजर नहीं आ रहा।
वन विभाग की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं और लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि केवल गश्त और चेतावनी से अब काम नहीं चलेगा, आदमखोर को जल्द पकड़ना या मारना जरूरी है।
दिलचस्प बात यह भी है कि ओणी गांव प्रदेश के वन मंत्री का गांव माना जाता है। ऐसे में स्थानीय लोग तंज कसते हुए पूछ रहे हैं कि आखिर इस आतंक से राहत कब मिलेगी।
खंडाह घाटी के लोगों की अब सिर्फ एक ही मांग है -उन्हें भयमुक्त जीवन वापस चाहिए।
















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