हरीश रावत ने टिप्पणी को बताया दुर्भाग्यपूर्ण, गोदियाल बोले–देश में कोई घुसपैठिया नहीं; भाजपा ने कांग्रेस से भी मांगा जवाब
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की उत्तराखंड से जुड़े ‘घुसपैठिया’ बयान पर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अखिलेश से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है।
भाजपा नेताओं ने भी बयान को उत्तराखंड के सम्मान से जोड़ते हुए कांग्रेस को घेरा।
वहीं, कांग्रेस के भीतर इस टिप्पणी को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया, जबकि प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि देश में कहीं कोई घुसपैठिया नहीं है।
धामी बोले-उत्तराखंड के संघर्ष और स्वाभिमान का अपमान
लखनऊ में 23 अक्टूबर को मीडिया से बातचीत के दौरान अखिलेश यादव ने कहा था, “सबसे बड़े घुसपैठिए यूपी में कौन हैं? उत्तराखंड के।” उनकी इस टिप्पणी के बाद विवाद शुरू हो गया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पलटवार करते हुए उत्तराखंड को देवभूमि और वीरभूमि बताया।
उन्होंने कहा कि राज्य के लोगों को घुसपैठिया कहना उनके स्वाभिमान, पहचान और संघर्ष का अपमान है।
धामी ने उत्तराखंड राज्य आंदोलन का जिक्र करते हुए मुलायम सिंह यादव के मुख्यमंत्री कार्यकाल में खटीमा,
मसूरी और रामपुर तिराहा में आंदोलनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई की याद दिलाई।
उन्होंने अखिलेश से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।
साथ ही कांग्रेस से सवाल किया कि क्या वह अपने राजनीतिक सहयोगी के इस बयान का समर्थन करती है।
हरीश रावत बोले-ऐसे शब्दों का इस्तेमाल उचित नहीं
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सोशल मीडिया पोस्ट में अखिलेश यादव की टिप्पणी को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
उन्होंने कहा कि टिप्पणी करते समय अखिलेश के मानस पटल पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का चित्र रहा होगा।
रावत ने याद दिलाया कि उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश कभी एक ही राज्य का हिस्सा थे।
विभाजन के बाद दोनों राज्यों में रहने वाले लोग अपने-अपने क्षेत्रों के सम्मानित नागरिक हैं।
उन्होंने कहा कि देश के भीतर काम के लिए एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने वाले लोगों का योगदान महत्वपूर्ण है।
राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता में ‘घुसपैठिया’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल उचित नहीं है।
रावत ने भाजपा पर इस शब्द का राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उसके उकसावे में आने की जरूरत नहीं है।
गोदियाल और शीशपाल बिष्ट की अलग-अलग प्रतिक्रिया
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि भारत का प्रत्येक नागरिक देश के किसी भी राज्य में रहने के लिए स्वतंत्र है।
उन्होंने टिप्पणी के संदर्भ पर सवाल उठाते हुए कहा कि संभव है अखिलेश ने मजाकिया अंदाज में अपनी पत्नी डिंपल यादव के संदर्भ में बात कही हो, जिनका उत्तराखंड से संबंध है।
वहीं, कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता शीशपाल बिष्ट ने भाजपा पर अखिलेश के बयान को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि भाजपा जनता का ध्यान उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था, बेरोजगारी और विकास से जुड़े सवालों से हटाना चाहती है।
बिष्ट के मुताबिक, अखिलेश की टिप्पणी को योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली पर राजनीतिक कटाक्ष के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
भाजपा विधायक और लखनऊ की महापौर ने भी साधा निशाना
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता एवं विधायक विनोद चमोली ने सवाल उठाया कि उत्तराखंड के नागरिकों को अपने ही
देश में रहने और काम करने के लिए किसी प्रमाणपत्र की जरूरत क्यों होनी चाहिए।
उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से भी अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की।
वहीं, लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल ने अखिलेश यादव पर पलटवार करते हुए कहा कि उन्हें उत्तराखंड के
लोगों पर टिप्पणी करने से पहले अपने राजनीतिक परिवार पर नजर डालनी चाहिए।
उन्होंने अखिलेश पर परिवार के लोगों को राजनीति में आगे बढ़ाने का आरोप भी लगाया।
सपा ने दी सफाई-बयान व्यक्ति विशेष के संदर्भ में था
विवाद बढ़ने के बाद समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता और उत्तराखंड प्रभारी राजेंद्र चौधरी ने सफाई दी कि अखिलेश
यादव की टिप्पणी उत्तराखंड के लोगों के लिए नहीं, बल्कि एक व्यक्ति विशेष के संदर्भ में थी।
उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव का उत्तराखंड के साथ भावनात्मक रिश्ता है, और वह प्रदेश के लोगों का सम्मान करते हैं।
अखिलेश की टिप्पणी पर भाजपा ने माफी की मांग उठाई है, जबकि सपा ने उसे व्यक्ति विशेष से जुड़ा बताया है।
कांग्रेस के नेताओं की प्रतिक्रियाओं में भी टिप्पणी पर आपत्ति और उसके राजनीतिक संदर्भ, दोनों बातें सामने आई हैं।















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