शराब पीकर स्कूल आने के आरोपी प्रिंसिपल सस्पेंड
महाराष्ट्र के हिंगोली जिले के लिंबाला गांव में सरकारी जिला परिषद स्कूल की बदहाल व्यवस्था के खिलाफ चल रहा ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान अब चर्चा में है।
ग्रामीणों के आंदोलन और लगातार शिकायतों के बाद स्कूल के प्रिंसिपल को निलंबित कर दिया गया है।
आंदोलनकारियों ने इसे अपनी पहली बड़ी जीत बताया है।
हालांकि, उनका कहना है कि प्रिंसिपल का निलंबन आंदोलन का अंत नहीं है। स्कूल में शिक्षकों की कमी और बुनियादी सुविधाओं की समस्या अभी भी बनी हुई है।
शराब पीकर स्कूल आने के आरोप
ग्रामीणों का आरोप था कि स्कूल के प्रिंसिपल कथित तौर पर शराब के नशे में स्कूल आते थे।
इससे बच्चों की पढ़ाई और स्कूल के माहौल पर असर पड़ने की शिकायत ग्रामीणों ने की थी।
इसी के बाद ग्रामीणों ने स्कूल की व्यवस्थाओं में सुधार की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया।
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी ग्रामीणों के साथ मिलकर इस अभियान का नेतृत्व किया।
आंदोलन की चेतावनी के बाद प्रिंसिपल पर कार्रवाई
आंदोलनकारियों के मुताबिक, ग्रामीणों की ओर से कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
इसके बाद 18 अगस्त 2026 को आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी गई।
इसके बाद शिक्षा विभाग ने कार्रवाई करते हुए आरोपी प्रिंसिपल को निलंबित कर दिया।
आंदोलनकारियों ने इसे ग्रामीणों की एकजुटता और लगातार संघर्ष का नतीजा बताया है।
अब्दुल और उसके दिवंगत पिता को समर्पित की जीत
आंदोलन की सफलता के बाद अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो में इस पहली जीत को गांव के छात्र अब्दुल और उसके दिवंगत पिता को समर्पित किया।
आंदोलनकारियों के मुताबिक, अब्दुल ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद स्कूल की व्यवस्था सुधारने की लड़ाई जारी रखने का जज्बा दिखाया है।
उनका कहना है कि किसी अपने को खोने का दर्द वापस नहीं किया जा सकता, लेकिन बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए स्कूल व्यवस्था सुधारने की लड़ाई जारी रखी जा सकती है।
पांच कक्षाओं के लिए सिर्फ दो शिक्षक
आंदोलनकारियों का कहना है कि स्कूल में सिर्फ प्रिंसिपल की समस्या नहीं है। स्कूल में शिक्षकों की भी भारी कमी है।
बताया गया है कि पांच कक्षाओं को संभालने के लिए फिलहाल सिर्फ दो शिक्षक मौजूद हैं।
ऐसे में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने का दावा किया जा रहा है।
बेंच, शौचालय और दूसरी सुविधाओं की भी मांग
ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि प्रिंसिपल के निलंबन के बाद भी आंदोलन जारी रहेगा।
उनकी प्रमुख मांगों में स्कूल में पर्याप्त नए शिक्षकों की नियुक्ति, बच्चों के लिए बेंच की व्यवस्था,
साफ-सुथरे शौचालय और स्कूल की खिड़कियों समेत अन्य बुनियादी सुविधाओं को दुरुस्त करना शामिल है।
आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक स्कूल में बच्चों के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जातीं, तब तक ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान जारी रहेगा।
पहली मांग पूरी, असली लड़ाई अभी बाकी
लिंबाला के ग्रामीणों के लिए प्रिंसिपल का निलंबन भले ही पहली बड़ी सफलता है,
लेकिन आंदोलनकारियों के मुताबिक असली लक्ष्य स्कूल की पूरी व्यवस्था को सुधारना है।
उनका कहना है कि बच्चों को बेहतर शिक्षा और सुरक्षित माहौल मिलना उनका अधिकार है।
इसलिए शिक्षकों की नियुक्ति और बुनियादी सुविधाओं की मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
















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