30 अक्टूबर को बदरीनाथ से देहरादून लौटते समय दुर्घटनाग्रस्त हुए ट्रांस भारत एविएशन के
हेलीकॉप्टर VT-HCX हादसे की जांच में नया खुलासा हुआ है।
जांच एजेंसी के मुताबिक हादसे से पहले पायलट ने न तो कोई इमरजेंसी कॉल (Mayday) की
और न ही खराब मौसम या कम विजिबिलिटी की शिकायत दर्ज कराई थी।
दो मिनट में गायब हुआ हेलीकॉप्टर का संपर्क
हेलीकॉप्टर ने दोपहर 1:12 बजे बदरीनाथ से उड़ान भरी थी।
महज दो मिनट बाद 1:14 बजे जोशीमठ वैली के ऊपर इसका संपर्क और ट्रैकिंग सिग्नल गायब हो गया।
चमोली जिला प्रशासन की शुरुआती रिपोर्ट में हाथी पर्वत क्षेत्र में खराब मौसम को हादसे की वजह बताया गया था।
उस दिन मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट भी जारी किया था।
हालांकि, जांच अधिकारियों के मुताबिक पायलट की ओर से मौसम खराब होने की कोई सूचना नहीं दी गई थी।
इंजन फेल होने के बजाय टक्कर का शक
जांच से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि हेलीकॉप्टर के तेजी से नीचे गिरने का तरीका इंजन फेल होने जैसा नहीं लग रहा।
चश्मदीदों और सामने आए वीडियो में भी हेलीकॉप्टर अचानक तेजी से नीचे आता दिखाई दिया।
ऐसे में अब हवा में किसी चीज से टकराने की आशंका की भी जांच की जा रही है।
इसमें पक्षी या ड्रोन से टक्कर की संभावना शामिल है। हालांकि, अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
सेना की सिग्नल सेंटर टीम ने सबसे पहले धुआं उठता देखा था। टीम के मुताबिक हेलीकॉप्टर तेजी से ऊंचाई खो रहा था।
ब्लैक बॉक्स नहीं, कैमरे से मिल सकता है सुराग
हादसे में दिल्ली के पायलट कैप्टन हिमांशु सब्बरवाल समेत बेंगलुरु के पांच यात्रियों की मौत हुई थी।
मृतकों में क्राइम ब्रांच इंस्पेक्टर अरुण सालुंके भी शामिल थे।
हेलीकॉप्टर में ब्लैक बॉक्स नहीं था। ऐसे में जांच टीम अब पायलट की सीट के पीछे लगे कैमरे की तलाश कर रही है।
माना जा रहा है कि कैमरे की रिकॉर्डिंग से हादसे के आखिरी पलों की जानकारी मिल सकती है।
खराब मौसम और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र के कारण कैमरे की तलाश में मुश्किलें आ रही हैं।
हादसे से पहले इसी रूट पर दो अन्य हेलीकॉप्टर भी उड़े थे, जिन्होंने किसी तरह की परेशानी की सूचना नहीं दी थी।
फिलहाल एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) और डीजीसीए की टीमें हादसे के कारणों की जांच कर रही हैं।
















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