कहा- न्यूजरूम बंद होने का खतरा
डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (DNPA) ने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन कानून के प्रावधानों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
संगठन का कहना है कि कानून के कुछ प्रावधान खोजी पत्रकारिता, सूचना के अधिकार और पत्रकारों के
गोपनीय सूत्रों की सुरक्षा को प्रभावित कर सकते हैं।
अदालत ने मामले में केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है।
पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर असर का दावा
27 अक्टूबर को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने DNPA की याचिका पर सुनवाई की।
संगठन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता माधवी दीवान ने दलीलें रखीं।
याचिका में डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट के कई प्रावधानों और DPDP नियम, 2025 के कुछ
नियमों को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई है।
DNPA का तर्क है कि इन प्रावधानों के कारण पत्रकारिता के दौरान व्यक्तिगत डेटा के इस्तेमाल पर ऐसी बाधाएं लग सकती हैं, जिनसे जनहित से जुड़े खुलासे प्रभावित होंगे।
गोपनीय सूत्रों की सुरक्षा पर चिंता
DNPA ने आशंका जताई कि डेटा संरक्षण कानून का इस्तेमाल पत्रकारों के गोपनीय सूत्रों की पहचान उजागर करने के लिए किया जा सकता है।
संगठन के मुताबिक, खोजी पत्रकारिता में कई बार ऐसी जानकारियां सामने लानी पड़ती हैं, जिनके लिए संबंधित व्यक्ति की सहमति लेना संभव नहीं होता।
याचिका में कानून की धारा 37(1) पर भी सवाल उठाए गए हैं।
इस प्रावधान के तहत कुछ परिस्थितियों में केंद्र सरकार को ऑनलाइन सामग्री तक सार्वजनिक पहुंच रोकने की शक्ति मिलती है।
अदालत ने क्या कहा
सुनवाई के दौरान माधवी दीवान ने दलील दी कि यदि पत्रकारों को खबर प्रकाशित करने से पहले
संबंधित व्यक्ति की सहमति पर निर्भर रहना पड़ेगा, तो इससे पत्रकारिता का काम प्रभावित हो सकता है।
उन्होंने चुनौती दिए गए प्रावधानों पर रोक लगाने की मांग भी की।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि मीडिया संगठन सरकार को ऐसे सुझाव दे सकते हैं,
जिनसे पत्रकारिता की स्वतंत्रता सुरक्षित रहे और कानून का दुरुपयोग न हो।
पीठ ने लोगों की निजता और मीडिया के अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखने की जरूरत पर भी जोर दिया।
RTI कानून में बदलाव को भी चुनौती
DNPA ने सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम की धारा 8(1)(j) में किए गए संशोधन को भी चुनौती दी है।
संगठन का कहना है कि इससे सार्वजनिक हित से जुड़ी जानकारी हासिल करने में कठिनाई हो सकती है।
मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 17 नवंबर को निर्धारित है।
फिलहाल याचिका में उठाए गए सवालों पर अदालत का अंतिम फैसला आना बाकी है।















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