हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय (एचएनबीजीयू) को राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD), नई दिल्ली से एक प्रतिष्ठित प्रस्तुति-परक नाट्य कार्यशाला का प्रोजेक्ट मिला है।
विश्वविद्यालय के लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र के सहनिदेशक महेंद्र सिंह पंवार को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इसे विश्वविद्यालय और केंद्र के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
30 से 40 दिनों तक चलेगी प्रस्तुति-परक नाट्य कार्यशाला
इस परियोजना के तहत लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र में लगभग
30 से 40 दिनों की प्रस्तुति-परक नाट्य कार्यशाला आयोजित की जा रही है।
कार्यशाला में प्रसिद्ध मराठी साहित्यकार महेश एलकुंचवार के चर्चित नाटक ‘विरासत’ का मंचन तैयार किया जाएगा।

‘विरासत’ नाटक के जरिए मिलेगा व्यावहारिक रंगमंच प्रशिक्षण
‘विरासत’ भारतीय पारिवारिक रिश्तों, सामाजिक ताने-बाने, पीढ़ियों के वैचारिक संघर्ष और मानवीय संवेदनाओं पर आधारित एक चर्चित नाटक है।
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को अभिनय, वाचन, चरित्र-निर्माण, मंच-सज्जा, शारीरिक अभिव्यक्ति और प्रस्तुति की विभिन्न रंगमंचीय तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
महेंद्र सिंह पंवार करेंगे निर्देशन
कार्यशाला का निर्देशन लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र के सहनिदेशक महेंद्र सिंह पवार कर रहे हैं, जो स्वयं राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के स्नातक हैं और पिछले 19 वर्षों से रंगमंच के क्षेत्र में सक्रिय हैं।
वहीं, केंद्र के पूर्व छात्र अंकित भट्ट सह-निर्देशक के रूप में नाटक की प्रस्तुति को अंतिम रूप देने में सहयोग कर रहे हैं।
विभिन्न संकायों के विद्यार्थी ले रहे हैं भाग
कार्यशाला में एम.ए. रंगमंच के विद्यार्थियों के अलावा विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों और विभागों के छात्र-छात्राएं भी उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं।
इससे विद्यार्थियों को पेशेवर रंगमंच की कार्यप्रणाली को करीब से समझने और सीखने का अवसर मिल रहा है।
अगस्त में होगा ‘विरासत’ का मंचन
कार्यशाला के समापन पर 24, 25 या 26 अगस्त को लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र में नाटक ‘विरासत’ का मंचन किया जाएगा।
यह प्रस्तुति राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय द्वारा स्वीकृत परियोजना का मुख्य आकर्षण होगी।

विश्वविद्यालय के लिए सम्मान की बात: महेंद्र सिंह पंवार
महेंद्र सिंह पवार ने कहा कि राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से मिला यह प्रोजेक्ट विश्वविद्यालय के लिए गर्व और सम्मान का विषय है।
इससे विद्यार्थियों को पेशेवर रंगमंच की बारीकियों को सीखने का अवसर मिलेगा
और विश्वविद्यालय की सांस्कृतिक एवं रंगमंचीय गतिविधियों को नई पहचान मिलेगी।

















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