मोदी कैबिनेट से मंजूरी; अहमदाबाद दावेदारी में आगे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट ने भारत की 2030 राष्ट्रमंडल खेलों (Commonwealth Games 2030) की मेजबानी की दावेदारी को मंजूरी दे दी।
भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) की सहमति के बाद आया यह फैसला अहमदाबाद को संभावित मेजबान शहर के रूप में और मजबूत बनाता है।
कैबिनेट की हरी झंडी और अहमदाबाद का नाम आगे
युवा कार्य एवं खेल मंत्रालय के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए सरकार ने दावेदारी से जुड़े सभी दस्तावेज और गारंटी उपलब्ध कराने की अनुमति दी।
आधिकारिक बयान में कहा गया कि “अहमदाबाद खेलों की मेजबानी के लिए आदर्श शहर है। यहां विश्वस्तरीय स्टेडियम, अत्याधुनिक अभ्यास सुविधाएं और मजबूत खेल संस्कृति मौजूद है।”
नरेंद्र मोदी क्रिकेट स्टेडियम और सरदार वल्लभ भाई पटेल खेल एंक्लेव इस आयोजन के प्रमुख वेन्यू हो सकते हैं।
भारत की दूसरी मेजबानी की संभावना
भारत ने इससे पहले 2010 में दिल्ली में राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी की थी। अब 15 साल बाद एक बार फिर देश के पास यह मौका है।
कनाडा के पीछे हटने के बाद भारत की दावेदारी और मज़बूत हो गई है। मेजबान शहर का अंतिम फैसला नवंबर 2025 में ग्लास्गो में होने वाली राष्ट्रमंडल महासभा की बैठक में होगा।
खेलों के साथ रोजगार और निवेश के अवसर
सरकार का मानना है कि इतने बड़े आयोजन की मेजबानी से न सिर्फ भारत की खेल छवि और गौरव बढ़ेगा बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी फायदा होगा।
खेल विज्ञान, इवेंट मैनेजमेंट, लॉजिस्टिक्स, प्रसारण, मीडिया, आईटी और पब्लिक रिलेशंस जैसे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर खुलेंगे। इसके अलावा देशभर में खेलों में भागीदारी और नई पीढ़ी का उत्साह भी बढ़ेगा।
ग्लास्गो 2026 खेलों के लिए लगभग 1300 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। वहीं भारत की 2010 दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स में खर्च 70,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था, जबकि शुरुआती अनुमान सिर्फ 1,600 करोड़ रुपये का था। इस बार सरकार का दावा है कि बेहतर प्रबंधन और तैयारियों से खर्च नियंत्रित रहेगा।
72 देशों के खिलाड़ी, भारत को बड़ा मंच
राष्ट्रमंडल खेलों में 72 देशों के खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। भारत को उम्मीद है कि 2030 में अहमदाबाद की मेजबानी से देश न केवल खेल कूटनीति में मज़बूत होगा बल्कि 2036 ओलंपिक की दावेदारी के लिए भी रास्ता साफ होगा।

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