रीजनल रिपोर्टर

सरोकारों से साक्षात्कार

शरद पूर्णिमा पर मां धारी देवी के दर्शन को उमड़े श्रद्धालु

सुरक्षा के लिए निकासी रास्ते बढ़ाने की जरूरत

बदरीनाथ-केदारनाथ जाने वाले यात्री भी पहुंच रहे मंदिर, नवविवाहित जोड़े सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद लेने आते हैं

श्रीनगर गढ़वाल। शरद पूर्णिमा के अवसर पर मां धारी देवी मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।

बदरीनाथ-केदारनाथ धाम की यात्रा पर जा रहे यात्री भी मां के दर्शन कर आगे बढ़ रहे हैं।

प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने के बीच मंदिर में सुरक्षा व्यवस्था और आवाजाही के रास्तों को बढ़ाने की जरूरत भी महसूस की जा रही है।

सिद्धपीठ नहीं, लेकिन श्रद्धालुओं की अटूट आस्था

बहुत से भक्त मां धारी देवी मंदिर को सिद्धपीठ मानते हैं, जबकि यह सिद्धपीठ नहीं है।

वर्षों पहले बाढ़ में बहकर आई मां धारी की मूर्ति को कलियासौड़ क्षेत्र के धारी गांव के लोगों ने नदी से उठाकर एक चट्टान पर स्थापित किया था।

श्रीनगर जलविद्युत परियोजना के डूब क्षेत्र में आने के कारण धारी देवी मंदिर को ऊपर उठाया गया।

अलकनंदा हाइड्रोपावर कंपनी के बांध की झील में मंदिर के डूब क्षेत्र में आने पर इसकी अपलिफ्टिंग का विरोध भी हुआ था।

केंद्र सरकार की पूर्व कैबिनेट मंत्री उमा भारती, गंगा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले

प्रो. जीडी अग्रवाल समेत कई आस्थावान लोगों ने मंदिर को ऊपर उठाने का विरोध किया।

इसके बाद निर्माणदायी कंपनी जीवीके ने मंदिर को उसी स्थान पर झील में सीसी कॉलमों पर उठाकर भव्य स्वरूप प्रदान किया।

सोशल माध्यमों पर पर्याप्त प्रचार के चलते मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ी है।

भक्तों की आस्था के कारण मां धारी को सिद्धिदात्री के रूप में भी पूजा जाने लगा है।

नवविवाहित जोड़े भी लेते हैं मां का आशीर्वाद

मंदिर का भव्य स्वरूप बनने से पहले भी नवविवाहित जोड़े दाम्पत्य जीवन की शुरुआत के लिए मां धारी देवी के दर्शन करने आते थे।

अब मंदिर के दिव्य और भव्य स्वरूप के कारण दूर-दूर से जोड़े यहां पहुंच रहे हैं।

वे मां से अखंड सौभाग्य, सुख और समृद्धि का आशीर्वाद लेते हैं।

मंदिर में निकासी के रास्ते बढ़ाने की जरूरत

मंदिर में हर दिन पहुंच रही श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के लिहाज से एहतियाती उपाय जरूरी हैं।

संभव है कि मंदिर के निर्माण और वर्तमान स्वरूप की योजना बनाते समय यह विचार नहीं रहा हो कि भविष्य में यहां हजारों श्रद्धालु प्रतिदिन पहुंचेंगे।

वर्तमान में मंदिर में आने-जाने के लिए एक ही रास्ता उपलब्ध है।

ऐसे में आवाजाही को सुचारु बनाने और सुरक्षा की दृष्टि से कम से कम तीन से चार रास्तों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

विशेष रूप से मंदिर परिसर से बाहर निकलने के लिए कम से कम दो निकासी रास्ते बनाए जाने जरूरी हैं,

ताकि भीड़ बढ़ने की स्थिति में श्रद्धालुओं की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जा सके।

https://regionalreporter.in/iapsm-conference-srinagar-2026/

https://youtu.be/LNGk1UF7kmo?si=TeLp4T8BxdXH0hdN

ganga asnora
+ posts

लेखिका बीते ढाई दशक से पत्रकारिता क्षेत्र में सक्रिय हैं.वर्ष 2015 से रीजनल रिपोर्टर के संपादक के पद पर कार्यरत हैं.

Leave a Reply

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *