बदलेंग नीट-जेईई के सवाल, सिर्फ रटना नहीं अब तार्किक समझ भी जरूरी
डॉक्टर या इंजीनियर बनने की दौड़ में शामिल छात्रों की कोचिंग कक्षाओं पर निर्भरता को कम करने की दिशा में शिक्षा मंत्रालय ने महत्वपूर्ण पहल की है। यह कदम भारत की शिक्षा व्यवस्था को सिर्फ रटने से बाहर निकालकर बच्चों को स्कूली माहौल में शिक्षित, खेल-कूद और कला-केंद्रित विकास की ओर मोड़ने का प्रयास है।
मंत्रालय ने NEET और JEE जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्न-पैटर्न में बदलाव के लिए तैयारी शुरू कर दी है, जिसका असर अगले सत्र में देखा जा सकता है।
नौ-सदस्यीय समिति का गठन और कार्यक्षेत्र
शिक्षा मंत्रालय की ओर से उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी की अध्यक्षता में एक नौ-सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। इस समिति में CBSE, NCERT, IIT मद्रास, IIT कानपुर, NIT त्रिची और विभिन्न शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हैं।
समिति का मुख्य उद्देश्य है—
- स्कूल तथा कोचिंग के बीच मौजूद अंतर की पहचान करना,
- रटंतमक शिक्षण से हटकर बुद्धि, तर्क एवं व्यक्तित्व पर आधारित मूल्यांकन तैयार करना,
- डमी स्कूलों के उदय पर रोक,
- और अभिभावकों व शिक्षकों की सोच में बदलाव लाना ।
- यह समिति मासिक रूप से शिक्षा मंत्री को प्रगति रिपोर्ट सौंपेगी ।
प्रतियोगी परीक्षाओं में बदलाव की रूपरेखा
समिति ने सुझाव दिए हैं कि NEET, JEE मेन जैसी परीक्षाओं के प्रश्नों में अब रटंतमक सवालों की जगह तर्क-ज्ञान, समस्या-समाधान और व्यक्तित्व आधारित सवाल शामिल हों।
प्रश्नपत्र कक्षा 11–12 के CBSE व राज्य बोर्ड के पाठ्यक्रमों से ही तैयार किए जाएंगे, जिससे कोई छात्र केवल “रट्टा मार” कर उत्तीर्ण न हो सके ।
इसके अलावा, परीक्षा प्रणाली को भूतपूर्व दो-चरणीय मॉडल (स्क्रीनिंग + मुख्य परीक्षा) की ओर पुनर्गठित करने पर भी विचार चल रहा है, जिसे कोचिंग संस्थाओं ने सुगम उपाय के रूप में सुझाया है।
समिति का कहना है कि कोचिंग-कक्षाओं के मॉडल को स्कूलों के भीतर ही समाहित करने की आवश्यकता है। उदाहरणस्वरूप, नवोदय विद्यालयों में कोचिंग-सदृश शैक्षणिक व्यवस्था लागू की जा रही है।
भविष्य में स्कूलों में अतिरिक्त क्लीनिकल, स्पोर्ट्स और करियर काउंसलिंग को अनिवार्य रूप से जोड़ा जाएगा ताकि छात्र बाहर से कोचिंग लेने की आवश्यकता महसूस ही न करें ।
अभिभावकों को संज्ञान में लाने की योजना
समिति ने संतानों की कोचिंग निर्भरता घटाने हेतु अभिभावकों की काउंसलिंग पर विशेष जोर दिया है। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि कोचिंग पर अत्यधिक निर्भरता ना केवल बुद्धि विकास को प्रभावित कर रही है, बल्कि उसमें अवसाद और तनाव की घटनाएं भी तेजी से बढ़ रही हैं।

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