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स्कूल की राह भी एक ट्रैक: घुमक्कड़ शिक्षक, साइकिल और जुनून की कहानी

उमेश नैलवाल

भागती-दौड़ती जिंदगी के बीच जहां लोग जिम्मेदारियों के बोझ तले अपने शौक और सपनों को भूल जाते हैं,

वहीं अल्मोड़ा के एक गुरुजी ऐसे भी हैं जो रोजमर्रा की जिंदगी में भी रोमांच खोज लेते हैं। पढ़ाने के साथ-साथ

यात्राओं, ट्रैकिंग और साइकिलिंग के जरिए वह जीवन को पूरे उत्साह से जीने का संदेश दे रहे हैं।

एक अध्यापक, जो रोमांच की गठरी लिए निकल पड़ता है।

आज के दौर में जब जीवनशैली और स्वास्थ्य को लेकर चारों ओर हताशा दिखाई देती है, जब अक्सर लोग

जिम्मेदारियों और व्यस्तताओं के बीच खुद को थका हुआ और निराश महसूस करते हैं। जवान से लेकर बुजुर्ग और

बेरोजगार से लेकर कामकाजी व्यक्ति तक-हर कोई जैसे किसी अदृश्य दौड़ में शामिल है। ऐसे समय में एक

जिंदादिल शिक्षक भी है, जो अपने काम के साथ-साथ जीवन में उत्साह, सेहत और रोमांच को भी बराबर महत्व देता है।

प्राथमिक विद्यालय बोहरागांव के शिक्षक नवीन बिष्ट की अलग पहचान

अल्मोड़ा जिले के चौखुटिया क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय बोहरागांव के शिक्षक नवीन बिष्ट उन्हीं लोगों में से एक हैं।

वे केवल शिक्षक ही नहीं, बल्कि एक घुमक्कड़ और खिलाड़ी भी हैं। उनकी जीवनशैली इस बात का उदाहरण है

कि यदि मन में उत्साह और जिज्ञासा हो, तो जिम्मेदारियों के बीच भी जीवन को रोमांच से भरा जा सकता है।

स्कूल तक का सफर भी किसी ट्रैक से कम नहीं

विद्यालय तक सड़क होने के बावजूद उनका रोज का सफर थोड़ा अलग है। अक्सर वे आधे रास्ते तक बाइक से

जाते हैं और फिर नदी, पगडंडी लांघते, लगभग चार किलोमीटर का ट्रैक करते हुए स्कूल पहुंचते हैं। कई बार

साइकिल से ही पूरा रास्ता तय करते हैं। पढ़ाने के बाद उसी तरह वापस लौटना भी उनकी दिनचर्या का हिस्सा है।

यह केवल स्कूल आने-जाने का तरीका नहीं, बल्कि जीवन को सक्रिय और ऊर्जावान बनाए रखने का उनका अपना अंदाज है।

मनाली से लेह तक 900 किमी साइकिल यात्रा

2024 में जब उनसे पहली बार मुलाकात हुई, तब वे साइकिल चलाकर मनाली से लेह की लगभग 900 किमी लंबी यात्रा पूरी कर लौटे थे।

इससे पहले भी वे कई यात्राएं और ट्रैक अकेले ही कर चुके हैं। दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट के बेस कैंप तक पहुंचना भी उनके साहसिक अनुभवों में शामिल है।

अदिकैलाश से उमलिंग ला तक का रोमांच

2021 से उन्होंने साइकिल से यात्राएं शुरू की। अक्टूबर 2025 में मासी (अल्मोड़ा) से अदिकैलाश (पिथौरागढ़) तक (700किमी) का सफर भी अकेले साइकिल से पूरा किया।

साइकिल से ही लेह से दुनिया के सबसे ऊंचे मोटर योग्य दर्रे उमलिंग ला तक भी पहुंचे, जिसकी ऊंचाई लगभग 5800 मीटर से अधिक है।

इससे पहले नवीन बिष्ट रूपकुंड ट्रेक, क्वारी पास ट्रेक (जोशीमठ) में पंगारचुला (5200मीटर), ब्रह्मताल (वाण से), सतोपंथ चोटी (स्वर्गरोहिनी) कैम्प-2 (6200मीटर) तक ट्रेक पूरे कर चुके हैं।

देश-विदेश की यात्राओं का अनुभव

वो बताते हैं 2018 में उन्होंने बाइक से टनकपुर, बनबसा होते हुए नेपाल के पोखरा और काठमांडू से बिहार,

प बंगाल, दार्जिलिंग, नाथुला पास होते हुए यूपी, बिहार और हरियाणा से वापसी की।

खेलों में भी सक्रिय भागीदारी

विभागीय खेलों में भी नवीन बिष्ट पूर्णतः सक्रिय रहते हैं। जेवलिन थ्रू और 100 मीटर दौड़ (40-50 एज ग्रुप) में राष्ट्रीय AICS खेल चुके हैं।

जीवन जीने का अलग संदेश

ऐसे उत्साही और जिंदादिल लोग ही याद दिलाते हैं कि जीवन केवल भीड़ के साथ चलने का नाम नहीं है।

सुकून ढूंढा जा सकता है-बस देखने वाली नजर और जीने का जिगर चाहिए।

नवीन बिष्ट जैसे शिक्षक सिखाते हैं कि कैसे जिम्मेदारियों के बीच अपने सपनों को जिंदा रखना भी जरूरी है।

उनके विद्यार्थी किताबों से जितना सीखते होंगे, उतना ही उनके जीवन से भी सीखते होंगे कि मंजिल तक पहुंचने के लिए रास्तों से दोस्ती करनी पड़ती है।

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