सोमवार, 25 अगस्त को भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम में सर्वोच्च न्यायालय में जल्द ही दो नए नाम शामिल होने जा रहे हैं।
बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस आलोक अराधे और पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस विपुल मनुभाई पंचोली को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाने की सिफारिश की गई है।
कॉलेजियम की बैठक और निर्णय
सीजेआई की अध्यक्षता वाले पांच न्यायाधीशों के कॉलेजियम में जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस बी.वी. नागरत्ना शामिल रहे।
बैठक के बाद कॉलेजियम की सिफारिश सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर सार्वजनिक की गई। अब केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद यह नियुक्तियां औपचारिक रूप से हो पाएंगी।
इस कदम के साथ सुप्रीम कोर्ट अपनी स्वीकृत क्षमता 34 जजों तक पहुंच जाएगा, जबकि फिलहाल वहां 32 न्यायाधीश कार्यरत हैं।
जस्टिस विपुल पंचोली का सफर
अहमदाबाद में 28 मई 1968 को जन्मे जस्टिस विपुल पंचोली ने 1991 में वकालत की शुरुआत की। लंबे समय तक उन्होंने गुजरात उच्च न्यायालय में प्रैक्टिस की और फिर न्यायपालिका में शामिल हुए।
जुलाई 2023 में उनका स्थानांतरण पटना उच्च न्यायालय में हुआ, जहां उन्होंने न्यायाधीश के रूप में पदभार संभाला।
दो साल बाद जुलाई 2025 में उन्हें पटना हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया। अगर केंद्र की मंजूरी मिलती है तो सुप्रीम कोर्ट में उनके कार्यकाल के बाद मई 2031 में वह भारत के मुख्य न्यायाधीश भी बनेंगे और लगभग 16 महीने तक इस पद पर रहेंगे। उनका कार्यकाल 27 मई 2033 को समाप्त होगा।

जस्टिस आलोक अराधे का परिचय
13 अप्रैल 1964 को रायपुर में जन्मे जस्टिस आलोक अराधे का न्यायिक सफर भी लंबा और विविध अनुभवों से भरा रहा है। उन्हें 29 दिसंबर 2009 को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया था।
इसके बाद उन्होंने कर्नाटक, जम्मू-कश्मीर और तेलंगाना उच्च न्यायालयों में न्यायाधीश तथा कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की जिम्मेदारियां निभाईं।
वर्तमान में वह बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यरत हैं और उनकी नियुक्ति से सुप्रीम कोर्ट को एक अनुभवी जज मिलने जा रहा है।
दोनों न्यायाधीशों की नियुक्ति न केवल सुप्रीम कोर्ट की संख्या को पूर्ण करेगी, बल्कि न्यायपालिका को अलग-अलग क्षेत्रों और अनुभवों से समृद्ध भी करेगी। खासकर जस्टिस पंचोली की भविष्य की भूमिका महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि वह आने वाले समय में देश के मुख्य न्यायाधीश भी बनेंगे।

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