प्रवासियों ने फूंका आंदोलन का बिगुल
नई दिल्ली | 10 जनवरी, 2026
उत्तराखंड की बेटी अंकिता भंडारी के लिए न्याय की गूँज अब देश की राजधानी तक पहुँच गई है। दिल्ली में बसे प्रवासी उत्तराखंडी संगठनों ने एक सुर में अंकिता हत्याकांड की CBI जांच को सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में कराने की पुरजोर मांग की है। संगठनों का कहना है कि राज्य सरकार की अब तक की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में रही है, इसलिए निष्पक्ष न्याय के लिए न्यायिक देखरेख अनिवार्य है।
सरकार के दावों पर सवाल
प्रवासी संगठनों ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर मुख्यमंत्री के उस बयान को ‘भ्रामक’ करार दिया है जिसमें कहा गया था कि CBI जांच की सिफारिश परिजनों की इच्छा पर की गई है। नेताओं ने सवाल उठाया कि जब परिजन यह मांग महीनों से कर रहे थे, तो सरकार ने अब तक फैसला क्यों नहीं लिया? उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का पिछला रिकॉर्ड अपराधियों को बचाने और मामले की लीपापोती करने वाला रहा है।

रविवार को ‘उत्तराखंड बंद’ का आह्वान
न्याय की इस लड़ाई को निर्णायक मोड़ पर ले जाने के लिए प्रवासी संगठनों ने रविवार को आयोजित ‘देशव्यापी उत्तराखंड बंद’ को अपना पूर्ण समर्थन दिया है।
- ज्ञापन की रणनीति: वरिष्ठ नेता हरिपाल रावत और धीरेंद्र प्रताप ने बताया कि बंद के दिन ही राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और महिला आयोग को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
- नेताओं से संपर्क: आंदोलनकारियों ने केंद्रीय मंत्री अजय टम्टा सहित सांसद अनिल बलूनी, त्रिवेंद्र सिंह पंवार और राज महालक्ष्मी से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपे और मामले में सक्रिय हस्तक्षेप की मांग की।
अनसुलझे सवाल और VIP की मिस्ट्री
विज्ञप्ति में इस बात पर गहरा रोष व्यक्त किया गया कि मुख्य अभियुक्तों को सजा मिलने के बावजूद असली साजिशकर्ता और उस ‘VIP’ का नाम अब तक सामने नहीं आया है, जिसके लिए अंकिता पर अनैतिक दबाव बनाया गया था। संगठनों का दावा है कि हाल ही में उर्मिला सनावर द्वारा किए गए खुलासों ने इस अंदेशे को और पुख्ता कर दिया है कि मामले में बहुत कुछ छिपाया जा रहा है।

“हम इस मामले को इसके निर्णायक अंजाम तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के लिए न तो कोई कोताही बरती जाएगी और न ही कसर छोड़ी जाएगी।”
— प्रवासी संगठन प्रतिनिधि




















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