बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने यह कदम UGC के नए कानून और प्रयागराज माघ मेले के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद महाराज के शिष्यों के साथ कथित मारपीट की घटना से आहत होकर उठाने की बात कही है।
इस्तीफे के बाद जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया।सोमवार शाम को अलंकार अग्निहोत्री ने जिला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए।
उन्होंने दावा किया कि डीएम आवास में उन्हें करीब 20 मिनट तक बंधक बनाकर रखा गया और उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि डीएम अविनाश सिंह को लखनऊ से आए एक फोन कॉल पर अपशब्दों का इस्तेमाल किया गया, जिसे उन्होंने स्वयं स्पीकर पर सुना।
अलंकार अग्निहोत्री के अनुसार उन्हें दो घंटे के भीतर सरकारी आवास खाली करने का अल्टीमेटम दिया गया। इसके बाद पुलिस द्वारा उनके आवास पर लगाया गया टेंट भी हटवा दिया गया, जिससे उन्होंने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। इस दौरान डीएम आवास के बाहर उनके समर्थकों की भारी भीड़ मौजूद रही।
मामले को गंभीरता से लेते हुए शासन ने अलंकार अग्निहोत्री को निलंबित कर दिया है। साथ ही मंडलायुक्त बरेली को पूरे प्रकरण की जांच सौंपी गई है। जांच अवधि के दौरान अलंकार अग्निहोत्री को डीएम कार्यालय शामली से संबद्ध किया गया है।
राज्यपाल को भेजे गए अपने इस्तीफे में अलंकार अग्निहोत्री ने लिखा कि वे UGC Regulations 2026 के विरोध और प्रयागराज माघ मेले में ज्योर्तिमठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद महाराज के ब्राह्मण बटुक शिष्यों के साथ हुई कथित मारपीट के विरोध में तत्काल प्रभाव से अपने पद से इस्तीफा दे रहे हैं।
अलंकार अग्निहोत्री 2019 बैच के PCS अधिकारी हैं। उन्होंने अपने इस्तीफे में UGC के नए नियमों को शिक्षा व्यवस्था पर हमला बताया है।
उनके अनुसार नए नियमों में विश्वविद्यालयों की आरक्षण नीतियों में बदलाव, प्रवेश परीक्षाओं का केंद्रीकरण और पाठ्यक्रमों में धार्मिक व सांस्कृतिक विषयों को सीमित करने जैसे प्रावधान शामिल हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रयागराज की घटना ने धार्मिक भावनाओं को आहत किया है। माघ मेले के दौरान ज्योर्तिमठ के शिष्यों की शिखा पकड़कर कथित मारपीट को ब्राह्मण परंपरा का अपमान बताया गया है।
फिलहाल इस त्यागपत्र और लगाए गए आरोपों को लेकर सरकार या नियुक्ति विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। संबंधित अधिकारियों ने टिप्पणी करने से इनकार किया है।

















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