नियम तोड़ने पर जेल और जुर्माने का प्रावधान
उत्तराखंड में जनगणना 2027 का पहला चरण 10 अप्रैल 2026 से स्वगणना
(Self Enumeration) के साथ शुरू होने जा रहा है।
इसके लिए भारत के महापंजीयक ने सभी राज्यों के जनगणना निदेशालयों को
जनगणना अधिनियम 1948 के प्रावधानों को लेकर सर्कुलर जारी किया है।
इस सर्कुलर में जनता की भागीदारी सुनिश्चित करने के साथ ही जनगणना कार्य
में लगे अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही भी तय की गई है।
उत्तराखंड में तीन चरणों में होगी जनगणना
देश के अधिकांश राज्यों में जनगणना दो चरणों में होगी, लेकिन उत्तराखंड में इसे तीन चरणों में पूरा किया जाएगा।
पहला चरण
- 10 अप्रैल से 24 अप्रैल 2026: स्वगणना सुविधा
- 25 अप्रैल से 24 मई 2026: मकान सूचीकरण और मकान गणना
दूसरा चरण
- 1 सितंबर से 30 सितंबर 2026: हिमाच्छादित क्षेत्रों में जनगणना
यह चरण उत्तराखंड के बर्फीले और दुर्गम इलाकों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहेगा।
तीसरा चरण
- 9 फरवरी से 28 फरवरी 2027: प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में जनगणना
जनता के लिए क्या हैं नियम
जनगणना अधिनियम 1948 के तहत आम जनता के लिए भी स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं।
अगर कोई व्यक्ति:
- वैध सवाल का गलत जवाब देता है
- जवाब देने से इनकार करता है
- जनगणना कर्मियों को घर में प्रवेश नहीं देता
- घर के बाहर लिखे गए नंबर या चिन्ह हटाता है
- गलत जानकारी देता है
- बिना अनुमति जनगणना कार्यालय में प्रवेश करता है
तो उस पर 1000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
अधिकारियों-कर्मचारियों पर भी सख्त प्रावधान
सर्कुलर के अनुसार यदि कोई जनगणना अधिकारी:
- अपने कर्तव्यों का पालन नहीं करता
- झूठी जानकारी दर्ज करता है
- दस्तावेज छिपाता या नष्ट करता है
- बिना अनुमति जानकारी सार्वजनिक करता है
- जानबूझकर अभद्र या अनुचित सवाल पूछता है
तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई, जुर्माना और 3 साल तक की जेल का प्रावधान है।
गोपनीय रहेगी आपकी जानकारी
जनगणना के दौरान दी गई जानकारी पूरी तरह गोपनीय रहेगी।
किसी भी व्यक्ति को जनगणना अधिकारी की पुस्तक, रजिस्टर या रिकॉर्ड देखने का अधिकार नहीं होगा।
यह डेटा किसी सामान्य सिविल या आपराधिक मामले में साक्ष्य के रूप में भी उपयोग नहीं किया जा सकेगा, सिवाय जनगणना अधिनियम के तहत अपराधों के मामलों में।



















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