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IIT-IIM और UPSC के बाद IAS बनीं दिव्या मित्तल ने शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल

देश की प्रतिष्ठित संस्थाओं IIT दिल्ली, IIM बैंगलोर और UPSC जैसी कठिन परीक्षाओं में सफलता हासिल करने वाली IAS

अधिकारी दिव्या मित्तल ने वर्तमान शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि स्कूल और कॉलेज हमें

सफल प्रोफेशनल तो बना रहे हैं, लेकिन मानसिक रूप से मजबूत और संतुलित इंसान बनाना नहीं सिखा पा रहे।

सफलता के शिखर से शिक्षा व्यवस्था पर सवाल

IAS दिव्या मित्तल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था छात्रों को Achieve

करना तो सिखाती है, लेकिन खुश रहना, अकेलेपन से लड़ना और मानसिक शांति बनाए रखना नहीं सिखाती।

उन्होंने लिखा कि लोग सालों तक केवल करियर और उपलब्धियों के पीछे भागते रहते हैं, लेकिन भावनात्मक संतुलन और

आत्मिक शांति जैसे विषय शिक्षा का हिस्सा नहीं बन पाते।

कौन हैं IAS दिव्या मित्तल?

Divya Mittal भारतीय प्रशासनिक सेवा की चर्चित अधिकारियों में गिनी जाती हैं। उन्होंने IIT दिल्ली से बीटेक और IIM बैंगलोर

से MBA किया है। इसके बाद उन्होंने लंदन में JP Morgan जैसी बड़ी कंपनी में नौकरी की, लेकिन बाद में देश सेवा के लिए भारत लौट आईं।

साल 2012 की UPSC परीक्षा में 68वीं रैंक हासिल करने वाली दिव्या मित्तल उत्तर प्रदेश कैडर की 2013 बैच की अधिकारी हैं।

वह मिर्जापुर, संतकबीरनगर और देवरिया जैसे जिलों में जिलाधिकारी के रूप में कार्य कर चुकी हैं। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश

सरकार के राजस्व विभाग में विशेष सचिव के पद पर तैनात हैं।

‘इमोशनल रेगुलेशन’ नहीं सिखाती शिक्षा

दिव्या मित्तल ने कहा कि स्कूलों में बच्चों को पीरियोडिक टेबल और कठिन फार्मूले तो याद करवाए जाते हैं, लेकिन यह नहीं

सिखाया जाता कि दुख, तनाव और टूटे हुए मन को कैसे संभालना है।

उनका मानना है कि आज की पीढ़ी को भावनाओं को समझने और व्यक्त करने के बजाय उन्हें दबाना सिखाया गया है, जिसकी

वजह से मानसिक तनाव तेजी से बढ़ रहा है।

‘ना’ कहना और अपनी बात रखना भी जरूरी

IAS दिव्या मित्तल के अनुसार, शिक्षा व्यवस्था छात्रों को अच्छे निबंध लिखना तो सिखाती है, लेकिन अपनी तकलीफ व्यक्त

करना या गलत चीजों के खिलाफ खड़े होना नहीं सिखाती।

उन्होंने कहा कि ऑफिस में बुलीइंग से कैसे निपटना है, अपनी सीमाएं कैसे तय करनी हैं और कब ‘ना’ कहना जरूरी है, यह

किसी पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं है।

फाइनेंशियल लिटरेसी की कमी पर चिंता

दिव्या मित्तल ने कहा कि पढ़ाई के दौरान छात्र गणित के कठिन सवाल हल करना सीख जाते हैं, लेकिन पैसों का सही प्रबंधन,

कर्ज के जाल से बचना और आर्थिक संतुलन बनाए रखना नहीं सीख पाते।

उन्होंने कहा कि पैसा केवल कमाने की चीज नहीं, बल्कि सम्मान और स्वतंत्रता से भी जुड़ा होता है।

अकेलेपन और आत्म-समझ पर भी दिया जोर

उन्होंने कहा कि स्कूलों में बच्चे हमेशा लोगों से घिरे रहते हैं, इसलिए एडल्ट लाइफ का अकेलापन उन्हें डराने लगता है।

उनके अनुसार, खुद का सबसे अच्छा दोस्त बनना और आत्म-समझ विकसित करना बेहद जरूरी है।

दिव्या मित्तल ने कहा कि असली शिक्षा वही है, जो इंसान को यह समझा सके कि जीवन में उसके लिए वास्तव में क्या मायने रखता है।

https://regionalreporter.in/the-ground-reality-of-ig-garhwals-claims/
https://youtu.be/P4dYKabSTrA?si=e3jztGDVIDuzv5HN
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