चांद के रास्ते कमांडर ने मांगी मदद
NASA के ऐतिहासिक Artemis II Moon Mission में एक दिलचस्प टेक्निकल गड़बड़ी सामने आई।
चांद की ओर बढ़ रहे इस मिशन में उड़ान के करीब 7 घंटे बाद Microsoft Outlook के दो वर्जन अचानक काम करना बंद कर गए।
इसके बाद मिशन कमांडर Reid Wiseman को ग्राउंड कंट्रोल से तकनीकी मदद मांगनी पड़ी।

क्या हुआ Orion कैप्सूल के अंदर?
रिपोर्ट्स के मुताबिक कमांडर रीड वाइसमैन ने बताया कि उनके tablet/PCD में Outlook (New) और Outlook (Classic) दोनों काम नहीं कर रहे थे।
इसके बाद ह्यूस्टन स्थित मिशन कंट्रोल ने सिस्टम को remote troubleshoot कर समस्या को ठीक करने की कोशिश की।
हालांकि राहत की बात यह रही कि यह गड़बड़ी केवल एक डिवाइस तक सीमित थी और बाकी क्रू के सिस्टम सामान्य रूप से काम करते रहे।

मिशन पर नहीं पड़ा कोई असर
NASA ने साफ किया कि यह समस्या केवल administrative और communication tools से जुड़ी थी।
Orion spacecraft के navigation, propulsion, life-support और mission-critical systems पूरी तरह सामान्य रहे।
Artemis II फिलहाल लगभग 10 दिन के मिशन पर है, जिसमें चार अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा का फ्लाईबाय कर पृथ्वी पर लौटेंगे।
कितनी है मिशन की लागत?
NASA के Artemis कार्यक्रम की कुल अनुमानित लागत करीब 90 बिलियन डॉलर बताई जा रही है, जबकि Artemis II मिशन पर अकेले भारी खर्च हुआ है।
इस बीच Outlook crash की खबर सोशल मीडिया पर वायरल होते ही मीम्स की बाढ़ आ गई।
Reddit और X पर यूजर्स ने इसे “space में भी Outlook वही कर रहा है जो धरती पर करता है” जैसे मजाकिया कमेंट्स के साथ ट्रेंड कर दिया।
क्यों है खास चांद मिशन
यह मिशन Apollo 17 के बाद 50 साल से ज्यादा समय में पहला crewed moon flyby mission है।
इसमें Reid Wiseman, Victor Glover, Christina Koch और Jeremy Hansen शामिल हैं।
यह मिशन भविष्य में 2028 के lunar landing mission की तैयारी का अहम चरण माना जा रहा है।

आर्टेमिस II मिशन क्यों है महत्वपूर्ण
आर्टेमिस II मिशन इसलिए बेहद खास है क्योंकि यह 50 साल बाद इंसानों की चांद के पास वापसी है।
यह NASA के Artemis कार्यक्रम का पहला मानव-सहित चंद्र फ्लाईबाय मिशन है, जिसमें Orion spacecraft,
life-support, deep-space communication और crew safety systems का वास्तविक परीक्षण किया जा रहा है।
यह मिशन भविष्य में चांद पर दोबारा मानव लैंडिंग, वहां स्थायी बेस बनाने
और आगे मंगल ग्रह पर मानव मिशन की तैयारी का आधार बनेगा।
लगभग 10 दिन की यह यात्रा NASA के लिए deep-space technology,
radiation safety और long-duration crewed missions को validate करने का अहम चरण है।



















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