रीजनल रिपोर्टर

सरोकारों से साक्षात्कार

IG Garhwal के दावों की जमीनी हकीकत


मीडिया रिपोर्ट्स ने दिखाया आईना

लोकतंत्र में जब जवाबदेही से बचने के लिए सरकारी तंत्र सवालों से दूरी बनाने लगे, तो व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक हो

जाता है। श्रीनगर कोतवाली से लेकर आईजी गढ़वाल कार्यालय तक इन दिनों कुछ ऐसे ही हालात देखने को मिल रहे हैं, जहां

एक ओर पत्रकारों के सवालों से बचने के आरोप लग रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत और मीडिया रिपोर्ट्स के बावजूद

अधिकारियों के बयान अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं।

वन आग्नि मामले में दावों पर सवाल

गढ़वाल आईजी से जंगलों में लग रही वन में आग को लेकर सवाल किए गए तो उनका कहना था कि उनके पास ऐसी कोई सूचना नहीं पहुंची है।

हालांकि एक प्रमुख समाचार पत्र में प्रकाशित रिपोर्ट में साफ तौर पर उल्लेख किया गया कि देवप्रयाग क्षेत्र में रातभर जंगल

धधकते रहे। रिपोर्ट्स और स्थानीय स्तर पर सामने आई तस्वीरों के बीच आईजी का बयान अब सवालों के घेरे में है।

यात्रा व्यवस्था पर ‘सब ठीक’ का दावा

यात्रा व्यवस्थाओं और भीड़ नियंत्रण को लेकर पूछे गए सवालों पर आईजी गढ़वाल ने कहा कि अभी तक यात्रा के दौरान किसी गंभीर समस्या की जानकारी सामने नहीं आई है।

लेकिन चतुर्थ केदार Rudranath Temple के कपाट खुलने के दौरान सामने आई तस्वीरों और स्थानीय जानकारी के अनुसार,

जहां लगभग 200 यात्रियों के ठहरने की क्षमता थी, वहां करीब 600 यात्री पहुंच गए। क्षमता से कई गुना अधिक भीड़ होने के

बावजूद व्यवस्थाओं को लेकर अधिकारियों के दावों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

रिपोर्टर को ब्लॉक करने के आरोप

सिर्फ उच्च अधिकारी ही नहीं, बल्कि स्थानीय पुलिस अधिकारियों पर भी सवाल उठ रहे हैं। श्रीनगर कोतवाली के SHO पर एक

रीजनल रिपोर्टर का नंबर ब्लॉक करने के आरोप सामने आए हैं।

जानकारी के अनुसार 4 दिसंबर की सुबह करीब 4 बजे खनन से जुड़े एक मामले को लेकर रिपोर्टर ने SHO से संपर्क किया

था। इसके बाद उसी नंबर से दोबारा कॉल करने पर नंबर लगातार बंद या अनरीचेबल बताता रहा।

हालांकि दूसरे नंबर से कॉल करने पर संपर्क संभव हो गया, जिसके बाद रिपोर्टर का नंबर ब्लॉक किए जाने की चर्चा शुरू हुई।

वहीं SHO का कहना है कि उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है।

जवाबदेही को लेकर उठे बड़े सवाल

केशव थलवाल, पंकज प्रकरण सहित कई मामलों में पहले भी पुलिस की भूमिका और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर सवाल उठते रहे

हैं। ऐसे मामलों में अधिकारियों के बयानों और जमीनी स्थितियों के बीच अंतर लगातार चर्चा का विषय बनता जा रहा है।

अब बड़ा सवाल यही है कि जब मीडिया रिपोर्ट्स, स्थानीय घटनाएं और जमीनी हालात अलग तस्वीर दिखा रहे हों, तब जिम्मेदार

अधिकारी स्पष्ट जवाब देने से क्यों बचते नजर आते हैं। जनता के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या जवाबदेही तय होगी या

फिर सवालों को इसी तरह टाला जाता रहेगा।

https://regionalreporter.in/initiative-by-the-srinagar-municipal-corporation/
https://youtu.be/P4dYKabSTrA?si=e3jztGDVIDuzv5HN
ganga asnora
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लेखिका बीते ढाई दशक से पत्रकारिता क्षेत्र में सक्रिय हैं.वर्ष 2015 से रीजनल रिपोर्टर के संपादक के पद पर कार्यरत हैं.

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