कलश यात्रा से होगी शुरुआत
मंदिर समिति ने दी जानकारी, सचिव सूर्यप्रकाश और कोषाध्यक्ष हिमांशु बहुगुणा ने बताया पूरा कार्यक्रम
श्रीनगर गढ़वाल स्थित शीतला माता मंदिर में इस वर्ष 28 मई से 30 मई 2026 तक त्रिदिवसीय पूजा अनुष्ठान का आयोजन किया जाएगा।
मंदिर समिति के सचिव सूर्यप्रकाश और कोषाध्यक्ष हिमांशु बहुगुणा ने जानकारी देते हुए बताया कि यह आयोजन ज्येष्ठ माह की परंपरागत धार्मिक आस्था के अनुरूप किया जा रहा है।
28 मई को भव्य कलश यात्रा से होगी शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत 28 मई को कलश यात्रा के साथ होगी, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे।
यह यात्रा मंदिर परिसर से प्रारंभ होकर क्षेत्र में धार्मिक वातावरण का निर्माण करेगी।
29 मई को मातृ जगराता का आयोजन किया जाएगा, जिसमें भजन-कीर्तन और देवी आराधना के कार्यक्रम होंगे।
वहीं 30 मई को विशाल भंडारे के साथ इस तीन दिवसीय अनुष्ठान का समापन होगा।
शीतला माता मंदिर का धार्मिक महत्व
शीतला माता मंदिर क्षेत्र की प्रमुख आस्था का केंद्र माना जाता है।
मान्यता है कि माता शीतला संक्रामक रोगों से रक्षा करने वाली देवी हैं।
स्थानीय लोगों का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से की गई पूजा से चेचक, बुखार और अन्य संक्रामक बीमारियों से सुरक्षा मिलती है।
इसी आस्था के चलते हर वर्ष ज्येष्ठ माह में विशेष पूजा अनुष्ठान का आयोजन किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं।

मंदिर संरक्षण को लेकर जताई चिंता
मंदिर समिति के सचिव सूर्यप्रकाश और कोषाध्यक्ष हिमांशु बहुगुणा ने इस दौरान मंदिर के संरक्षण को लेकर चिंता भी व्यक्त की।
उन्होंने कहा कि मंदिर की धार्मिक और ऐतिहासिक विरासत को सुरक्षित रखने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है।
समिति ने बताया कि संसाधनों की कमी और रखरखाव से जुड़ी चुनौतियों के कारण मंदिर संरक्षण पर ध्यान देना जरूरी हो गया है।
युवाओं से जुड़ने की अपील
समिति पदाधिकारियों ने युवाओं से इस धार्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहर से जुड़ने की अपील की।
उन्होंने कहा कि यदि युवा पीढ़ी आगे आए तो मंदिर की परंपराएं और धार्मिक गतिविधियां और अधिक सशक्त हो सकती हैं।
युवाओं ने भी इस आयोजन और मंदिर संरक्षण को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया है
और इसे आगे बढ़ाने में सहयोग का आश्वासन दिया है।
वर्षों पुरानी परंपरा को मिलेगा नया स्वरूप
मंदिर समिति का कहना है कि यह आयोजन वर्षों पुरानी परंपरा को आगे बढ़ाने के साथ-साथ
समाज में धार्मिक आस्था और एकता का संदेश भी देगा।
समिति ने क्षेत्र के सभी श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है।
















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