एक ओर देशभर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं,
वहीं दूसरी ओर उत्तराखंड में आयुर्वेद एवं यूनानी विभाग के अंतर्गत कार्यरत योग अनुदेशक अपनी मांगों को लेकर काली पट्टी
बांधकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। योग अनुदेशकों का कहना है कि योग को बढ़ावा देने की बात तो की जाती है,
लेकिन योग सिखाने वाले प्रशिक्षकों की समस्याओं की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा।
‘दिया तले अंधेरा’ जैसी स्थिति: कमल रावत
उत्तराखंड योग अनुदेशक संघ के प्रदेश अध्यक्ष कमल रावत ने कहा कि योग अनुदेशक वर्षों से आयुर्वेद एवं यूनानी विभाग के तहत सेवाएं दे रहे हैं,
लेकिन उन्हें मिलने वाला मानदेय बेहद कम है। उन्होंने कहा कि “दिया तले अंधेरा” वाली स्थिति बनी हुई है।
सरकार योग को बढ़ावा देने की बात करती है, लेकिन योग प्रशिक्षकों के जीवनयापन की कठिनाइयों को नजरअंदाज किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान मानदेय में परिवार चलाना, यात्रा खर्च उठाना और दैनिक जरूरतों को पूरा करना संभव नहीं है।
काली पट्टी बांधकर किया जा रहा विरोध प्रदर्शन इसी उपेक्षा के खिलाफ प्रतीकात्मक आंदोलन है।
150 किलोमीटर दूर ड्यूटी, फिर भी नहीं मिलता पर्याप्त मानदेय
योग अनुदेशक रुचि लखेड़ा ने बताया कि उनकी तैनाती श्रीनगर से करीब 150 किलोमीटर दूर जशपुरखाल क्षेत्र के अस्पताल में है।
उन्होंने कहा कि इतनी लंबी दूरी तय करने के बावजूद मिलने वाला मानदेय बेहद कम है।
कई स्थानों तक सार्वजनिक परिवहन की सुविधा नहीं होने के कारण उन्हें निजी वाहन बुक कर जाना पड़ता है, जिससे खर्च और बढ़ जाता है।
उन्होंने बताया कि विभाग में कार्यरत होने से पहले वह ऑनलाइन योग कक्षाएं संचालित कर प्रतिमाह 25 से 30 हजार रुपये
तक कमा रही थीं, लेकिन सरकारी जिम्मेदारियों के कारण वह काम भी बंद करना पड़ा।
यात्रा खर्च ही नहीं निकल पा रहा: रुचि राणा
देवलगढ़ में कार्यरत योग अनुदेशक रुचि राणा ने बताया कि उनका कार्यस्थल लगभग 20 किलोमीटर दूर है।
सामान्य परिस्थितियों में आधे घंटे का सफर ट्रैफिक के कारण एक से डेढ़ घंटे में पूरा होता है।
रोजाना स्कूटी से आने-जाने में ईंधन का खर्च भी काफी बढ़ जाता है।
उन्होंने कहा कि मात्र 5 हजार रुपये के मानदेय में यात्रा, घरेलू जिम्मेदारियां और अन्य खर्च पूरे करना बेहद कठिन हो गया है।
यदि मानदेय उचित हो तो काम के प्रति संतोष की भावना बनी रहती है, लेकिन वर्तमान स्थिति में आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है।
सरकार से मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील
योग अनुदेशकों ने सरकार से मानदेय बढ़ाने, सेवा शर्तों में सुधार करने और योग प्रशिक्षकों की समस्याओं के समाधान की मांग
की है। उनका कहना है कि योग दिवस जैसे बड़े आयोजनों से पहले सरकार को योग को आगे बढ़ाने वाले प्रशिक्षकों की स्थिति
पर भी ध्यान देना चाहिए।
















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